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Himachal News: लाखों रुपये लेकर बनवाए फर्जी सेंक्शन ऑर्डर, आजीविका मिशन विभाग में 68 लाख का घोटाला
रुचि सांख्यान, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 04 Jun 2026 11:02 AM IST
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सार
हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए 68.31 लाख रुपये के कथित घोटाले के मामले में आरोपी आउटसोर्स कर्मचारी कार्तिक ठाकुर को अदालत से राहत नहीं मिली। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने निजी कंपनी के नाम पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खरीद के लिए फर्जी सेंक्शन ऑर्डर तैयार किए थे। पढ़ें पूरा मामला...
कोर्ट का आदेश
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में सरकारी दस्तावेज पर फर्जी हस्ताक्षर कर करीब 68.31 लाख रुपये के घोटाले के आरोपी आउटसोर्स कर्मचारी कार्तिक ठाकुर की दूसरी जमानत याचिका भी अदालत ने खारिज कर दी है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी ने लाखों रुपये लेकर निजी कंपनी के नाम पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीद के फर्जी सेंक्शन ऑर्डर बनाए थे।
आरोपी के बैंक खाते में अलग-अलग तारीखों पर मैसर्स एनके ट्रेडर्स की ओर से 14.80 लाख रुपये ट्रांसफर भी किए थे। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-एक शिमला प्रवीण गर्ग की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि मामले में चार्जशीट दाखिल होने मात्र को परिस्थितियों में बड़ा बदलाव नहीं माना जा सकता है।
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अदालत ने साफ किया कि पिछली जमानत याचिका खारिज होने के बाद वर्तमान हालात में ऐसा कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ है, जिससे आरोपी को जमानत दी जा सकती हो। मामला उस समय सामने आया था जब लाहौल-स्पीति की वर्तमान सहायक आयुक्त कल्याणी गुप्ता ने शिमला में अपनी पिछली पोस्टिंग के दौरान के रिकॉर्ड में सितंबर 2025 का एक मंजूरी आदेश देखा था। इस सरकारी दस्तावेज पर उनके जाली हस्ताक्षर थे। यह मामला संज्ञान में आने के बाद कल्याणी गुप्ता ने लिखित शिकायत पुलिस स्टेशन छोटा शिमला में दर्ज करवाई। इस आधार पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं में केस दर्जकर मामले की जांच शुरू।
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अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल चार्जशीट दाखिल होने से आरोपों की गंभीरता कम नहीं हो जाती। कोर्ट ने पहले भी जमानत याचिका अपराध की गंभीरता को देखते हुए खारिज की गई थी ऐसे में दोबारा जमानत याचिका स्वीकार करना पुराने आदेश की समीक्षा करने जैसा होगा। जिसकी कानूनी अनुमति नहीं है अदालत ने याचिका को विचार योग्य न मानते हुए सीधे खारिज कर दिया।