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हिमाचल: नेता विपक्ष जयराम ठाकुर बोले- जमीन घोटाले में बेनकाब हो रहे चेहरों को बचाने में जुटी सुक्खू सरकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 05 Apr 2026 05:12 PM IST
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सार

नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि चेस्टर हिल मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने के बजाय मुख्यमंत्री साक्ष्यों को दबाने और दोषियों को संरक्षण देने में जुटे हैं, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ और अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal Lop Jairam Thakur Says Sukhu Government Bent on Shielding Those Being Exposed in Land Scam
पूर्व सीएम एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर प्रदेश की सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है और कहा है कि जब भ्रष्टाचार में संलिप्त चेहरे बेनकाब होने लगे हैं, तो पूरी कांग्रेस पार्टी और सरकार में खलबली मच गई है। मंडी से मीडिया को जारी बयान में जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने के बजाय मुख्यमंत्री साक्ष्यों को दबाने और दोषियों को संरक्षण देने में जुटे हैं, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ और अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

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चेस्टर हिल्स मामले का विशेष उल्लेख करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भले ही सरकार ने भारी दबाव और सोशल मीडिया पर मामला उजागर होने के बाद मुख्य सचिव द्वारा जारी विवादास्पद पत्र को वापस ले लिया हो, लेकिन इससे सरकार की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती, बल्कि कई ऐसे अनसुलझे सवाल खड़े हो गए हैं जिनका जवाब 'व्यवस्था परिवर्तन' का नारा देने वाली इस 'सुख की सरकार' को जनता को देना ही होगा।

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जयराम ठाकुर ने सिलसिलेवार तरीके से सरकार को घेरते हुए पूछा कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि मुख्य सचिव द्वारा लिखे गए पत्र को आनन-फानन में वापस लेना पड़ा और क्या वह पत्र वास्तव में अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर लिखा गया था? उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यह पत्र किसके इशारे पर लिखा गया था और इसके पीछे वास्तविक मंशा क्या थी। विशेष रूप से अधिकारी की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाते हुए उन्होंने पूछा कि जब अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) अवकाश पर थे, तो उनके कार्यभार को संभाल रहे अधिकारी ने इतनी 'अतिरिक्त मेहनत' दिखाकर आनन-फानन में फैसला क्यों सुनाया और सबसे बड़ी बात यह कि दोनों पक्षों की दलीलें सुने बिना एकतरफा निर्णय किसके हित साधने के लिए लिया गया? 

जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री की भूमिका पर भी कड़ा एतराज जताया और कहा कि जब यह मामला मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक हो चुका था, तब मुख्यमंत्री पूरे प्रकरण से अनभिज्ञ होने का 'नाटक' क्यों करते रहे और लगातार संबंधित अधिकारियों का बचाव किस आधार पर किया जा रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के इस खेल में पर्दे के पीछे छिपे किरदारों को अब छिपने की जगह नहीं मिलेगी और सरकार को इन तीखे सवालों का जवाब देना ही पड़ेगा, क्योंकि प्रदेश की जनता देख रही है कि कैसे सत्ता का दुरुपयोग कर चहेतों को लाभ पहुँचाने की कोशिश की जा रही है। 

जयराम ठाकुर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पत्र वापस लेना केवल एक लीपापोती है, जबकि असली खेल उस प्रक्रिया और मंशा में छिपा है जिसके तहत एकतरफा आदेश पारित किए गए थे, और विपक्ष इस मामले को तार्किक परिणति तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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