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Himachal MGNREGA Scam: चंबा में 55 लाख के गड़बड़झाले में 22 वन अधिकारी-कर्मी विजिलेंस के रडार पर, जानें
Mon, 03 Aug 2026 10:51 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 03 Aug 2026 10:51 AM IST
सार
MGNREGA Scam Himachal: चंबा के तीसा, मसरूंड और टिकरीगढ़ वन परिक्षेत्र में मनरेगा कार्यों में कथित 55 लाख रुपये से अधिक के गड़बड़झाले की जांच में वन विभाग के 22 अधिकारी और कर्मचारी विजिलेंस के रडार पर हैं। जांच में रिकॉर्ड से अधिक कार्य और सामग्री दिखाकर भुगतान लेने के आरोप सामने आए हैं। विभागीय जांच में भी 41 में से 32 कार्यों में अनियमितताएं मिली थीं। विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
चंबा के वन परिक्षेत्र तीसा, मसरूंड और टिकरीगढ़ में मनरेगा कार्यों में हुए कथित लाखों के गड़बड़झाले के मामले में वन विभाग के 22 अधिकारी और कर्मचारी विजिलेंस के रडार पर हैं। जांच एजेंसी की प्रारंभिक छानबीन में अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन अफसरों और कर्मियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसमें रेंज और ब्लॉक ऑफिसर समेत वनरक्षक शामिल हैं।
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विजिलेंस की जांच के दौरान उपलब्ध अभिलेखों, तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों के बयानों में सामने आया है कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर आपराधिक षड्यंत्र करके सरकारी दस्तावेजों में वास्तविक कार्य एवं सामग्री से अधिक कार्य एवं सामग्री दर्शाकर जाली दस्तावेजों के आधार पर भुगतान प्राप्त किया।
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इस पूरे मामले में 55,01,782 रुपये सरकारी धन का गबन और दुरुपयोग किया। विजिलेंस जांच से पहले वन विभाग के विभागीय स्तर पर की गई जांच में भी सामने आया है कि 41 में से जिन 32 कार्यों में अनियमितताएं पाई गई हैं। इन कार्यों के निष्पादन और भुगतान के लिए आरोपी अधिकारी और कर्मचारी उत्तरदायी हैं। यह मामले उस समय सामने आए जब वर्ष 2019 में जिला परिषद सदस्य और स्थानीय लोगों ने इस बारे में शिकायतें कीं। मनरेगा कार्यों से जुड़े आरोपों की जांच के लिए उपायुक्त चंबा ने मामला जिला ग्रामीण विकास अभिकरण को भेजा।
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आने वाले दिनों में जांच में हो सकते हैं कई खुलासे
जांच में भ्रष्टाचार की परतें उखड़ना शुरू हुईं। डीआरडीए की ओर से गठित तकनीकी समिति ने वन परिक्षेत्र तीसा, मसरूंड और टिकरीगढ़ में मनरेगा के तहत कराए गए 41 कार्यों का निरीक्षण किया। इसमें 32 कार्यों में गंभीर तकनीकी और वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि कई कार्यों में सामग्री मद में भुगतान तो दिखाया गया लेकिन मौके पर सामग्री का इस्तेमाल ही नहीं हुआ था या वास्तविक कार्य रिकॉर्ड से कम पाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार सीओ लैंड डेवलपमेंट वर्क एट गुवाड़ी सेकेंड (तीसा रेंज) में सामग्री मद में 1.96 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए जबकि पुनर्मूल्यांकन में सामग्री का उपयोग शून्य पाया गया। मामला विजिलेंस के पास पहुंचा तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त होने पर तत्कालीन रेंज अधिकारियों, ब्लॉक अधिकारियों (डिप्टी रेंजर) और फॉरेस्ट गार्ड सहित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 467, 468, 471 और 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित-2018) की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(ए) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
विजिलेंस ब्यूरो ने मामले की जांच शुरू कर दी है और रिकॉर्ड, भुगतान प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। मामले की जांच में आने वाले दिनों में और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
जांच में भ्रष्टाचार की परतें उखड़ना शुरू हुईं। डीआरडीए की ओर से गठित तकनीकी समिति ने वन परिक्षेत्र तीसा, मसरूंड और टिकरीगढ़ में मनरेगा के तहत कराए गए 41 कार्यों का निरीक्षण किया। इसमें 32 कार्यों में गंभीर तकनीकी और वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि कई कार्यों में सामग्री मद में भुगतान तो दिखाया गया लेकिन मौके पर सामग्री का इस्तेमाल ही नहीं हुआ था या वास्तविक कार्य रिकॉर्ड से कम पाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार सीओ लैंड डेवलपमेंट वर्क एट गुवाड़ी सेकेंड (तीसा रेंज) में सामग्री मद में 1.96 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए जबकि पुनर्मूल्यांकन में सामग्री का उपयोग शून्य पाया गया। मामला विजिलेंस के पास पहुंचा तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त होने पर तत्कालीन रेंज अधिकारियों, ब्लॉक अधिकारियों (डिप्टी रेंजर) और फॉरेस्ट गार्ड सहित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 467, 468, 471 और 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित-2018) की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(ए) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
विजिलेंस ब्यूरो ने मामले की जांच शुरू कर दी है और रिकॉर्ड, भुगतान प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। मामले की जांच में आने वाले दिनों में और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।