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Himachal News: मेडिकल विवि की वित्तीय शक्तियां अब सरकार के पास, 3 विधेयक बने कानून

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला/धर्मशाला। Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 17 Mar 2026 09:56 AM IST
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सार

अब अटल विवि की वित्त समिति की अध्यक्षता प्रदेश सरकार के वित्त सचिव करेंगे। वहीं, हिमाचल प्रदेश नगर निगम एक्ट 1994 की कई धाराओं में संशोधन किया गया है। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal News: Financial Powers of Medical University Now Rest with the Government; 3 Bills Enacted into Law
अटल आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय (एएमआरयू) नेरचौक। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

लोकभवन ने अटल मेडिकल एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी हिमाचल प्रदेश संशोधन विधेयक 2024, हिमाचल प्रदेश नगर (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 और सरकारी कर्मियों की भर्ती और सेवा की शर्तें संशोधन विधेयक 2025 को मंजूरी दे दी है। 7 मार्च को राज्यपाल की ओर से दी मंजूरी के बाद सरकार ने इनके कानून बनने की अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं। इसके साथ ही नए प्रावधान लागू हो गए हैं।

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नए प्रावधान के अनुसार अब अटल विवि की वित्त समिति की अध्यक्षता प्रदेश सरकार के वित्त सचिव करेंगे। विवि के कर्मचारियों से जुड़े सभी वित्तीय और सेवा संबंधी मामलों को पहले वित्त समिति के समक्ष रखा जाएगा। इनमें नए पदों का सृजन, पदों को भरना, भर्ती और पदोन्नति नियम बनाना, वेतन और भत्तों में संशोधन शामिल हैं। वित्त समिति सिफारिशें तैयार कर सरकार को भेजेगी, जिसके बाद सरकार अंतिम निर्णय लेगी। अन्य सदस्यों की संरचना और उनका कार्यकाल विवि के नियमों के अनुसार तय होगा।
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हिमाचल प्रदेश नगर निगम एक्ट 1994 की कई धाराओं में संशोधन किया गया है। संशोधन के अनुसार अब नगरपालिकाओं के खातों का ऑडिट प्रधान लेखाकार लेखा परीक्षा (ऑडिट) के तकनीकी मार्गदर्शन में राज्य ऑडिट विभाग से किया जाएगा। यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी नगर परिषद के क्षेत्र का हिस्सा नगर निगम घोषित कर दिया जाता है तो मौजूदा सदस्यों के कार्यकाल पर तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा। 

उनका कार्यकाल निर्धारित अवधि तक रहेगा। नगर परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य की ओर से दिए इस्तीफे 15 दिन के भीतर स्वीकार करना अनिवार्य किया है। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उपायुक्त पद रिक्त होने की सूचना सरकार को देंगे। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना भी बढ़ाया है। पहले जहां कई मामलों में 500 से 2000 रुपये तक का जुर्माना था, उसे बढ़ाकर 2000 से 5000 रुपये कर दिया गया है। लगातार उल्लंघन होने पर प्रतिदिन 500 रुपये तक अतिरिक्त जुर्माना लगेगा। कुछ गंभीर मामलों में एक वर्ष तक की सजा या 20 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

पूर्व प्रकाशन की शर्त खत्म, भर्ती नियमों में संशोधन का रास्ता आसान
सरकारी कर्मचारियों की भर्ती और सेवा की शर्तें संशोधन विधेयक 2025 लागू होने के बाद सरकार को भर्ती और सेवा शर्तों से जुड़े नियमों में संशोधन करना पहले से आसान हो गया है। नए संशोधन के तहत उपधारा (1) में लिखे शब्द पूर्व प्रकाशन के बाद को हटा दिया गया है। पहले किसी भी नियम में बदलाव से पहले उसे पूर्व प्रकाशन के लिए जारी करना जरूरी होता था, जिससे उस पर सुझाव और आपत्तियां ली जा सकें। अब यह शर्त हटने के बाद सरकार को भर्ती और सेवा शर्तों से जुड़े नियमों में संशोधन करने की प्रक्रिया सरल और तेज हो जाएगी। इस बदलाव से प्रशासनिक निर्णय लेने में तेजी आएगी और जरूरत के अनुसार नियमों में तुरंत संशोधन संभव होगा। इसके लागू होने के बाद सरकार भविष्य में भर्ती और सेवा नियमों में बदलाव सीधे अधिसूचना के माध्यम से कर सकेगी।
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