सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal: No matter how heinous the crime, a minor's bail cannot be denied; High Court reverses decision

हिमाचल: अपराध कितना भी जघन्य क्यों नहीं हो, नाबालिग की जमानत नहीं रोक सकते, हाईकोर्ट ने पलटा फैसला

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 09 Jan 2026 11:22 AM IST
विज्ञापन
सार

 हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों की ओर से किया गया अपराध कितना भी गंभीर या जघन्य क्यों न हो, उसे जमानत देना एक अनिवार्य नियम है। 

Himachal: No matter how heinous the crime, a minor's bail cannot be denied; High Court reverses decision
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों की ओर से किया गया अपराध कितना भी गंभीर या जघन्य क्यों न हो, उसे जमानत देना एक अनिवार्य नियम है। केवल विशेष परिस्थितियों में ही उसकी जमानत रोकी जा सकती है। मामला जिला ऊना का है, जहां एक नाबालिग लड़की पर अपने साथियों के साथ मिलकर एक युवक की हत्या करने का आरोप था। पुलिस जांच में पाया गया कि लड़की और साथियों ने युवक के साथ मारपीट की, जिसका वीडियो भी सामने आया था। नाबालिग की जमानत अर्जी को पहले जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ऊना और फिर सत्र न्यायालय ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि अपराध अत्यंत जघन्य प्रकृति का है और इससे समाज में रोष है। न्यायाधीश विरेंद्र सिंह की कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसलों को पलटते हुए कहा कि जेजे एक्ट की धारा 12 में होगा अनिवार्य शब्द का इस्तेमाल किया गया है। इसका अर्थ है कि अपराध की प्रकृति गौण है। नाबालिग के मामले में अपराध की गंभीरता जमानत रोकने का आधार नहीं हो सकती। जमानत तभी रोकी जा सकती है, जब ठोस सबूत हों कि बाहर आने पर बच्चा अपराधियों के संपर्क में आएगा। निचली अदालतों ने केवल जघन्य अपराध के आधार पर जमानत रोकी, रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं था। कोर्ट ने नाबालिग याचिकाकर्ता को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है, लेकिन अभिभावक को वचन देना होगा कि वह किसी अपराधी के संपर्क में नहीं आएगी। साथ ही वह पढ़ाई जारी रखे।

Trending Videos

सेवानिवृत्त जजों के घरेलू सहायता भत्ते के लिए 3.54 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीशों और उनकी पत्नियों को मिलने वाले घरेलू सहायता भत्ते के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने 14 मई 2025 की अपनी पुरानी अधिसूचना में सुधार करते हुए अब यह लाभ अधिसूचना जारी होने की तारीख के बजाय 1 सितंबर 2021 से लागू करने का निर्णय लिया है। वित्त सचिव देवेश कुमार की ओर से अदालत में दायर हलफनामे में बताया गया है कि सरकार की ओर से इसके लिए 3.54 करोड़ की अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है। इस राशि को वित्तीय वर्ष 2025-26 के पूरक अनुदान के माध्यम से नियमित किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिए हैं कि वे एक हफ्ते के भीतर संबंधित हेड ऑफ अकाउंट और एरियर के भुगतान के लिए आवश्यक विवरण उपलब्ध कराएं, ताकि बकाया राशि का वितरण किया जा सके। राज्य सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि भुगतान में देरी जानबूझकर नहीं की गई थी। दूसरी ओर रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि हाईकोर्ट से जुड़े 29 प्रस्ताव अभी भी सरकार के पास लंबित हैं, जबकि 39 प्रस्तावों को अतिरिक्त जानकारी के अभाव में वापस कर दिया गया था। अदालत ने गृह सचिव हिमाचल प्रदेश की ओर से दायर हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed