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हालात: हिमाचल के 40 आदर्श अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी, मशीनरी का भी अभाव; जानें क्या बोले स्वास्थ्य मंत्री

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Mon, 23 Feb 2026 11:59 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2025-26 बजट सत्र में प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में आदर्श अस्पताल खोलने का निर्णय लिया था। वहीं, आज इनके हालात ये हैं कि इन अस्पतालों में पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी है। पढ़ें पूरी खबर...
 

Himachal Pradesh 40 model hospitals lack specialists and machinery
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश के आदर्श अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। 30 आदर्श अस्पतालों में 6-6 स्पेशलिस्ट की तैनाती की गई है, जबकि अन्य 40 अस्पतालों में चार से कम स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं। इन अस्पतालों में पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी है। वहीं, उपकरण और मशीनरियों का भी अभाव है।

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प्रदेश सरकार ने 2025-26 बजट सत्र में प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में आदर्श अस्पताल खोलने का निर्णय लिया था। इन अस्पतालों में छह-छह स्पेशलिस्ट की तैनाती के साथ उपकरण और मशीनरी स्थापित की जानी थी, लेकिन कई अस्पताल ऐसे हैं, जहां डॉक्टरों और उपकरण की कमी है। मरीजों को जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों न आना पड़े, इसके चलते सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्रों में आदर्श अस्पताल बनाने का निर्णय लिया था। कुल 70 आदर्श अस्पताल बनाने का निर्णय लिया गया था। इसमें कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड भी किया जाना था।
 
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अस्पतालों में डॉक्टरों और उपकरण की कमी के चलते मरीजों को कई किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेजों तक उपचार के लिए आना पड़ रहा है। जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। हालांकि, प्रदेश सरकार ने हाल ही में 300 डॉक्टरों, नर्सों और उपकरण खरीदने का फैसला लिया है। दरअसल आदर्श अस्पतालों में 6 स्पेशलिस्टों में एक गायनी, पीडियाट्रिक्स, आर्थोपेडिक्स, सर्जरी, रेडियोलॉजिस्ट और मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की तैनाती की जानी है। इसके अलावा नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की भी तैनाती की जानी है।

आदर्श अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है। मशीनरियां और उपकरण खरीदने के भी टेंडर किए जा रहे हैं। आदर्श अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जानी है। - कर्नल धनीराम शांडिल, स्वास्थ्य मंत्री

एम्स में जूनियर रेजिडेंट के भरे जाएंगे 10 पद
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर ने जूनियर रेजिडेंट नॉन-अकादमिक के 10 पदों को भरने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। संस्थान की ओर से जारी ताजा अधिसूचना के मुताबिक, इन पदों पर डॉक्टरों की नियुक्ति अनुबंध के आधार पर की जाएगी। खास बात यह है कि चयनित होने वाले डॉक्टरों को एम्स के अलग-अलग विभागों में उनकी योग्यता और संस्थान की जरूरत के हिसाब से तैनात किया जाएगा। कुल 10 पदों में से 8 पद सामान्य (अनारक्षित) वर्ग के लिए और 2 पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। चयनित डॉक्टरों को पे-मैट्रिक्स लेवल-10 के तहत 56,100 मूल वेतन के साथ अन्य सरकारी भत्ते मिलेंगे।

यह नियुक्ति 30 जून 2026 तक के लिए होगी, जिसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। उम्मीदवार के पास मान्यता प्राप्त संस्थान से एमबीबीएस की डिग्री और मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण होना अनिवार्य है। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि आवेदन केवल ऑनलाइन गूगल फॉर्म के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक उम्मीदवार 24 फरवरी दोपहर 12:00 बजे तक अपना पंजीकरण करा सकते हैं। आवेदन शुल्क सामान्य व ओबीसी वर्ग के लिए 1180 और एससी-एसटी वर्ग के लिए 590 निर्धारित किया गया है, जबकि दिव्यांगों के लिए आवेदन निशुल्क है। भर्ती के लिए साक्षात्कार 26 फरवरी 2026 को आयोजित किया जाएगा। इसके लिए उम्मीदवारों को सुबह 07:00 से 07:30 बजे के बीच एम्स बिलासपुर के प्रशासनिक ब्लॉक (तीसरी मंजिल) में रिपोर्ट करना होगा।

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