{"_id":"6a9fe20251bf5812c20a3ce8","slug":"himachal-pradesh-electricity-issues-sukhu-meets-manohar-lal-2026-09-08","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हिमाचल: सीएम सुक्खू ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल से की भेंट, हिमाचल के बिजली हितों से जुड़े मुद्दे उठाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिमाचल: सीएम सुक्खू ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल से की भेंट, हिमाचल के बिजली हितों से जुड़े मुद्दे उठाए
Tue, 08 Sep 2026 03:54 PM IST
Ankesh Dogra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 08 Sep 2026 03:54 PM IST
सार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के साथ बैठक में हिमाचल के निःशुल्क विद्युत हिस्से के बदले नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र, एसजेवीएन के निदेशक मंडल में स्वतंत्र निदेशकों के नामांकन, शानन जलविद्युत परियोजना के हस्तांतरण, केंद्रीय जलविद्युत परियोजनाओं से अतिरिक्त मुफ्त बिजली, बैरा स्यूल परियोजना और बीबीएमबी की अनुपयोगी भूमि जैसे मुद्दे उठाए। केंद्रीय मंत्री ने सभी मामलों पर सकारात्मक विचार का आश्वासन दिया।
विज्ञापन
केंद्रीय मंत्री से मुलाकात करते हुए सीएम सुक्खू।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल से मुलाकात की। बैठक में हिमाचल प्रदेश के विद्युत क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण और लंबे समय से लंबित मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के हितों से जुड़े इन मुद्दों के शीघ्र समाधान की मांग केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखी।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के निःशुल्क विद्युत हिस्से के एवज में नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र (आरईसी) प्रदान करने का मामला प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य को अपने निःशुल्क विद्युत हिस्से का उचित लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए आवश्यक स्पष्टीकरण और समाधान उपलब्ध करवाने का आग्रह किया गया। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) के निदेशक मंडल में हिमाचल प्रदेश की ओर से दो स्वतंत्र निदेशकों के नामांकन का मामला भी उठाया। उन्होंने राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए नामांकन प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आग्रह किया।
विज्ञापन
शानन परियोजना के हस्तांतरण का मुद्दा
बैठक में शानन जलविद्युत परियोजना को हिमाचल प्रदेश को हस्तांतरित करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना पर हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। शानन परियोजना से संबंधित मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2008 की जलविद्युत नीति लागू होने से पहले शुरू की गई केंद्रीय क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए परियोजना शुरू होने के बाद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के रूप में एक प्रतिशत अतिरिक्त मुफ्त बिजली देने की राज्य की मांग भी दोहराई।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से परियोजना प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलेगी और स्थानीय लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। राज्य सरकार के आकलन के अनुसार, इस व्यवस्था से हिमाचल प्रदेश को करीब 29.34 करोड़ रुपये का वार्षिक लाभ मिलने की संभावना है, जबकि अन्य लाभार्थी राज्यों पर लगभग 96.57 करोड़ रुपये का वार्षिक भार पड़ने का अनुमान है। राज्य के अनुसार हिमाचल प्रदेश का अनुमानित शुद्ध वार्षिक लाभ करीब 23.21 करोड़ रुपये रहेगा, जबकि अन्य लाभार्थी राज्यों पर टैरिफ प्रभाव लगभग 1.15 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
बैरा स्यूल परियोजना और बीबीएमबी भूमि का मामला भी उठा
मुख्यमंत्री ने 180 मेगावाट क्षमता की बैरा स्यूल जलविद्युत परियोजना को 40 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश को सौंपने का मामला भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने राज्य के हित में परियोजना के हस्तांतरण की आवश्यक प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
इसके साथ ही भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) द्वारा प्रदेश में अधिकृत ऐसी भूमि, जिसका वर्तमान में कोई उपयोग नहीं हो रहा है, उसे हिमाचल सरकार को उपयोग के लिए उपलब्ध करवाने की मांग की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भूमि का इस्तेमाल सरकारी कार्यालयों के निर्माण के साथ-साथ परियोजनाओं से विस्थापित लोगों के पुनर्वास और उन्हें भूमि उपलब्ध करवाने के लिए किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलविद्युत क्षेत्र हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय विकास का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में प्रदेश के विद्युत हितों से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र समाधान राज्य के विकास के लिए बेहद जरूरी है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों पर सकारात्मक रूप से विचार करने का आश्वासन दिया। बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने 180 मेगावाट क्षमता की बैरा स्यूल जलविद्युत परियोजना को 40 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश को सौंपने का मामला भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने राज्य के हित में परियोजना के हस्तांतरण की आवश्यक प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
इसके साथ ही भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) द्वारा प्रदेश में अधिकृत ऐसी भूमि, जिसका वर्तमान में कोई उपयोग नहीं हो रहा है, उसे हिमाचल सरकार को उपयोग के लिए उपलब्ध करवाने की मांग की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भूमि का इस्तेमाल सरकारी कार्यालयों के निर्माण के साथ-साथ परियोजनाओं से विस्थापित लोगों के पुनर्वास और उन्हें भूमि उपलब्ध करवाने के लिए किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलविद्युत क्षेत्र हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय विकास का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में प्रदेश के विद्युत हितों से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र समाधान राज्य के विकास के लिए बेहद जरूरी है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों पर सकारात्मक रूप से विचार करने का आश्वासन दिया। बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी मौजूद रहे।