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HP High Court: पिछड़ा वर्ग आयोग कार्यालय धर्मशाला शिफ्ट करने पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की रोक

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 10 Jan 2026 04:00 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यालय शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित नहीं होगा। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। पढ़ें पूरी खबर... 
 

Himachal Pradesh High Court stays shift of Backward Classes Commission office to Dharamshala
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 7 जनवरी को पारित उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित किया गया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने इस संबंध में प्रतिवादी राज्य सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी। तब तक आयोग का कार्यालय शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।

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जनहित याचिका में बताया कि सरकार ने आयोग के ढांचे और स्थान परिवर्तन का निर्णय कम समय में लिया है। आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति 3 दिसंबर 2025 को हुई। इसके बाद 23 दिसंबर को अन्य सदस्यों की नियुक्ति की गई। नियुक्तियों के ठीक अगले दिन, यानी 24 दिसंबर को कार्यालय स्थानांतरित करने का प्रस्ताव आ गया। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि मुख्य कार्यालय धर्मशाला शिफ्ट होगा, जबकि शिमला स्थित वर्तमान कार्यालय को कैंप ऑफिस के रूप में रखा जाएगा।
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याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस स्थानांतरण से प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ेंगी। वर्तमान में आयोग में कुल 11 पद भरे हुए हैं। इनमें से 6 कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी के हैं। याचिका में तर्क दिया गया है कि इतने कम स्टाफ वाले कार्यालय को शिफ्ट करने से न तो शिमला में भीड़ कम होगी और न प्रशासनिक लाभ होगा। याचिकाकर्ता ने बताया कि चयन आयोग का वर्तमान कार्यालय 99 वर्ष की लीज पर है, जिसके लिए 22.54 लाख रुपये एकमुश्त दिए गए हैं। अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि धर्मशाला में आयोग के लिए कौन सा और कैसा स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।

जूनियर इंजीनियरों की पदोन्नति पर लगी रोक जारी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सहायक अभियंता के पदों पर पदोन्नति से जुड़े एक मामले में अंतरिम आदेश में बदलाव करने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि एएमआईई योग्यता रखने वाले जूनियर इंजीनियरों के लिए आरक्षित 5 फीसदी कोटे को अन्य श्रेणियों में डायवर्ट करने पर लगाई गई रोक जारी रहेगी। यह मामला भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के कॉलम संख्या 11 (3) के तहत आने वाले पांच फीसदी कोटे से संबंधित है। पूर्व में, अदालत ने इस कोटे को स्नातक जूनियर इंजीनियरों को हस्तांतरित करने पर रोक लगा दी थी। कुछ आवेदकों ने इस आदेश में संशोधन की मांग करते हुए याचिका दायर की थी, जिसमें तर्क दिया गया था कि इस रोक के कारण उनकी पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि स्पष्ट पदोन्नति पर कोई पूर्ण रोक नहीं है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 29 सितंबर 2022 के आदेश में केवल कोटे के डायवर्जन (बदलाव) को रोका गया है। अदालत ने कभी भी पात्र एएमआईई उम्मीदवारों की पदोन्नति प्रक्रिया को रोकने का निर्देश नहीं दिया है।

अदालत ने आवेदकों के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि अंतरिम आदेश उनके करियर में बाधा बन रहा है। कोर्ट ने कहा कि यदि बोर्ड की किसी कार्रवाई या निष्क्रियता से कोई पक्ष परेशान है, तो उसका समाधान कहीं और है। चूंकि मुख्य रिट याचिका में हितधारकों के अधिकारों का फैसला होना अभी बाकी है, इसलिए इस चरण में अंतरिम आदेश में संशोधन का कोई ठोस आधार नहीं है।न्यायालय ने आवेदन को निपटाते हुए मुख्य याचिकाओं की अगली सुनवाई 16 अप्रैल के लिए निर्धारित की है।

बाघल लैंड लूजर्स ट्रांसपोर्ट सोसाइटी के चुनाव और सदस्यता की होगी जांच: हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बाघल लैंड लूजर्स ट्रांसपोर्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड दाड़लाघाट से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद पर महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सोसाइटी के सदस्यों की वैधता की गहन जांच की जाएगी ताकि भविष्य में होने वाले चुनावों में केवल पात्र व्यक्ति ही मतदान कर सकें। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटीज की ओर से 19 जुलाई 2018 को जारी उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सोसाइटी के 11 जोनों का निर्धारण सदस्यता रजिस्टर के क्रम संख्या के आधार पर किया गया था।

अदालत ने एसडीएम (नागरिक) को निर्देश दिया है कि वे इस पूरी प्रक्रिया के लिए असिस्टेंट रजिस्ट्रार को पर्याप्त स्टाफ और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएं। इस आदेश से उन सदस्यों को राहत मिलने की उम्मीद है जो लंबे समय से पारदर्शी चुनाव और सही सदस्यता की मांग कर रहे थे। अदालत ने इस प्रक्रिया के लिए एक सख्त समय सारिणी निर्धारित की है। अदालत ने असिस्टेंट रजिस्ट्रार को सदस्यता से जुड़े सभी विवादों और आपत्तियों का निपटारा 15 मार्च 2026 तक पूरा करने के आदेश दिए हैं। जांच के बाद केवल वैध सदस्यों की ही सूची जारी की जाएगी। वैध सदस्यों की नई सूची के आधार पर, 19 जुलाई 2018 के जोन निर्धारण के अनुसार, सोसाइटी के चुनाव 30 जून तक संपन्न कराने होंगे।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि प्रतिवादी 16 से 141 तक के सदस्य अवैध रूप से नामांकित किए गए हैं और वह निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करते। सोसाइटी ने भी स्वीकार किया कि कुछ नामांकन नियमों के विरुद्ध हुए हैं। कोर्ट ने सोलन के असिस्टेंट रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वह एक महीने के भीतर जनरल हाउस की बैठक बुलाए। वह सभी सदस्यों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनका नामांकन सहकारी समिति अधिनियम, नियम और उपनियमों के तहत हुआ है।
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