हिमाचल: जूनियर इंजीनियरों की पदोन्नति पर लगी रोक जारी, पांच फीसदी कोटे को संशोधन की अर्जी खारिज
हाईकोर्ट ने सहायक अभियंता के पदों पर पदोन्नति से जुड़े एक मामले में अंतरिम आदेश में बदलाव करने से इन्कार कर दिया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सहायक अभियंता के पदों पर पदोन्नति से जुड़े एक मामले में अंतरिम आदेश में बदलाव करने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि एएमआईई योग्यता रखने वाले जूनियर इंजीनियरों के लिए आरक्षित 5 फीसदी कोटे को अन्य श्रेणियों में डायवर्ट करने पर लगाई गई रोक जारी रहेगी। यह मामला भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के कॉलम संख्या 11 (3) के तहत आने वाले पांच फीसदी कोटे से संबंधित है। पूर्व में, अदालत ने इस कोटे को स्नातक जूनियर इंजीनियरों को हस्तांतरित करने पर रोक लगा दी थी। कुछ आवेदकों ने इस आदेश में संशोधन की मांग करते हुए याचिका दायर की थी, जिसमें तर्क दिया गया था कि इस रोक के कारण उनकी पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि स्पष्ट पदोन्नति पर कोई पूर्ण रोक नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 29 सितंबर 2022 के आदेश में केवल कोटे के डायवर्जन (बदलाव) को रोका गया है। अदालत ने कभी भी पात्र एएमआईई उम्मीदवारों की पदोन्नति प्रक्रिया को रोकने का निर्देश नहीं दिया है। अदालत ने आवेदकों के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि अंतरिम आदेश उनके करियर में बाधा बन रहा है। कोर्ट ने कहा कि यदि बोर्ड की किसी कार्रवाई या निष्क्रियता से कोई पक्ष परेशान है, तो उसका समाधान कहीं और है। चूंकि मुख्य रिट याचिका में हितधारकों के अधिकारों का फैसला होना अभी बाकी है, इसलिए इस चरण में अंतरिम आदेश में संशोधन का कोई ठोस आधार नहीं है।न्यायालय ने आवेदन को निपटाते हुए मुख्य याचिकाओं की अगली सुनवाई 16 अप्रैल के लिए निर्धारित की है।
बाघल लैंड लूजर्स ट्रांसपोर्ट सोसायटी के चुनाव और सदस्यता की होगी जांच
प्रदेश हाईकोर्ट ने बाघल लैंड लूजर्स ट्रांसपोर्ट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड दाड़लाघाट से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद नर महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सोसायटी के सदस्यों की वैधता की गहन जांच की जाएगी ताकि भविष्य में होने वाले चुनावों में केवल पात्र ही मतदान कर सकें। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसायटीज की ओर से 19 जुलाई 2018 को जारी उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सोसायटी के 11 जोनों का निर्धारण सदस्यता रजिस्टर के क्रम संख्या के आधार पर किया गया था। अदालत ने एसडीएम (नागरिक) को निर्देश दया है कि वे इस पूरी प्रक्रिया के लिए असिस्टेंट जिस्ट्रार को पर्याप्त स्टाफ और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएं। इस आदेश से उन सदस्यों को बाहत मिलने की उम्मीद है जो लंबे समय से पारदर्शी चुनाव और सही सदस्यता की मांग कर रहे ये।
अदालत ने इस प्रक्रिया के लिए एक सख्त समय सारिणी निर्धारित की है। अदालत ने असिस्टेंट रजिस्ट्रार को सदस्यता से जुड़े सभी विवादों और आपत्तियों का निपटारा 15 मार्च 2026 तक पूरा करने के आदेश दिए हैं। जांच के बाद केवल वैध सदस्यों की ही सूची जारी की जाएगी। वैध सदस्यों की नई सूची के आधार पर, 19 जुलाई 2018 के जोन निर्धारण के अनुसार, सोसा; टी के चुनाव 30 जून तक संपन्न कराने होंगे। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि प्रतिवादी 16 से 141 तक के सदस्य अवैध रूप से नामांकित किए गए हैं और वह निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करते। सोसायटी ने भी स्वीकार किया कि कुछ नामांकन नियमों के विरुद्ध हुए हैं। कोर्ट ने सोलन के असिस्टेंट रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वह एक महीने में जनरल हाउस की बैठक बुलाए और दस्तावेजों की बारीकी से जांच करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनका नामांकन सहकारी समिति अधिनियम, नियम और उपनियमों के तहत हुआ है।