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हिमाचल: गोल्डन आवर में उपचार दिलाने में पंजाब-उत्तराखंड से आगे निकला हिमाचल

Mon, 17 Aug 2026 11:03 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 17 Aug 2026 11:03 PM IST
सार

13 फरवरी 2026 से लागू इस योजना के 31 जुलाई तक के आंकड़ों में हिमाचल 375 मामलों के साथ देश में 10वें स्थान पर है। इनमें से 355 मामलों को इलाज के लिए मंजूरी दी गई है। पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों और कई क्षेत्रों में अस्पतालों तक पहुंच की चुनौती के बावजूद योजना के तहत उपचार स्वीकृत कराने में हिमाचल का प्रदर्शन पड़ोसी पंजाब और उत्तराखंड की तुलना में काफी बेहतर रहा है।

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Himachal surpasses Punjab and Uttarakhand in providing treatment during the golden hour
स्वास्थ्य विभाग, हिमाचल प्रदेश - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को हादसे के बाद महत्वपूर्ण गोल्डन आवर में त्वरित उपचार उपलब्ध कराने वाली केंद्र सरकार की पीएम राहत योजना के क्रियान्वयन में हिमाचल प्रदेश ने उत्तर भारत के कई राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। 13 फरवरी 2026 से लागू इस योजना के 31 जुलाई तक के आंकड़ों में हिमाचल 375 मामलों के साथ देश में 10वें स्थान पर है। इनमें से 355 मामलों को इलाज के लिए मंजूरी दी गई है। पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों और कई क्षेत्रों में अस्पतालों तक पहुंच की चुनौती के बावजूद योजना के तहत उपचार स्वीकृत कराने में हिमाचल का प्रदर्शन पड़ोसी पंजाब और उत्तराखंड की तुलना में काफी बेहतर रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों में योजना के तहत मामलों की संख्या में बड़ा अंतर सामने आया है।

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उत्तर प्रदेश 887 मामलों के साथ देश में चौथे स्थान पर है, जिनमें 679 को मंजूरी मिली है। जम्मू-कश्मीर 749 मामलों और 680 स्वीकृत मामलों के साथ पांचवें स्थान पर है। हरियाणा 492 मामलों और 431 स्वीकृत मामलों के साथ आठवें स्थान पर है। हिमाचल 375 मामलों के साथ दसवें स्थान पर है। इसके मुकाबले पीएम राहत योजना के क्रियान्वयन में पंजाब में केवल 27 मामले दर्ज हुए और पांच को मंजूरी मिली। उत्तराखंड 16 मामलों और सात स्वीकृत मामलों के साथ 24वें स्थान पर है। अन्य पड़ोसी क्षेत्रों में चंडीगढ़ में 20 मामले, जिनमें 15 स्वीकृत हुए, जबकि लद्दाख में 14 मामले और छह स्वीकृत मामले दर्ज किए गए। आंकड़ों से साफ है कि योजना के शुरुआती महीनों में हिमाचल ने पंजाब और उत्तराखंड की तुलना में अधिक मामलों को योजना के दायरे में लाकर उपचार की मंजूरी दिलाई। उधर, सात मामले ऐसे रहे जिन्हें पुलिस की ओर से निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने के कारण योजना से डिस्चार्ज किया गया। इसके अलावा 13 मामलों को पुलिस ने जानलेवा स्थिति नहीं होने के कारण योजना के लिए अपात्र पाया है।
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हादसे के बाद घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने और नजदीकी सूचीबद्ध अस्पताल की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए योजना को 112 आपातकालीन सेवा से जोड़ा गया है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में दुर्घटनास्थल से अस्पताल तक पहुंचने में समय लगने के कारण इस तरह का आपातकालीन समन्वय खास महत्व रखता है। योजना का उद्देश्य शुरुआती उपचार में देरी और आर्थिक कारणों से होने वाली परेशानी को कम करना है। योजना के तहत मोटर वाहन से किसी भी श्रेणी की सड़क पर हुए हादसे में घायल व्यक्ति को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख तक का कैशलेस इलाज दिया जाता है। यानी राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग या स्थानीय सड़क, हादसा किसी भी सड़क पर हुआ हो, पात्र पीड़ित को योजना का लाभ मिल सकता है।

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