Himachal: स्कूल समय के बाद जनगणना कार्य के आदेशों का विरोध, शिक्षकों ने दी बहिष्कार की चेतावनी
प्रदेश राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिक्षकों को स्कूल समय के बाद जनगणना के कार्य में लगाने के आदेशों का विरोध किया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शर्मा ने कहा कि पहले कभी भी जनगणना का कार्य स्कूल समय के बाद नहीं किया गया है। इस कार्य के लिए पूर्णकालिक समय की आवश्यकता होती है। संघ ने मांग की है कि ऐसे सभी आदेशों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। विभाग को इतनी अधिक संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगानी चाहिए थी। अन्य विभागों से भी इस कार्य के लिए सहायता ली जानी चाहिए थी। संघ के अनुसार, जनगणना कार्य के लिए पूर्णकालिक समय चाहिए। इसे स्कूल के घंटों के बाद पूरा करना अव्यावहारिक है।
महिला अध्यापकों की सुरक्षा एक प्रमुख चिंता है। खासकर यदि उन्हें रात में काम करना पड़े। पहले कभी भी जनगणना का कार्य स्कूल समय के बाद नहीं हुआ है। रमेश शर्मा ने आरोप लगाया कि विभाग अपनी गलती छिपाने का प्रयास कर रहा है। वह शिक्षकों का दमन करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षक संघ इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगा। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि आदेश वापस नहीं लिए गए, तो शिक्षक जनगणना कार्य का बहिष्कार करने के लिए विवश होंगे।
सीएम से मिलेंगे सीबीएसई परीक्षा उत्तीर्ण शिक्षक, मेरिट के आधार पर मांगेंगे नियुक्ति
सीबीएसई सब-कैडर के लिए चयनित सेवारत शिक्षकों ने अपनी नियुक्तियों को लेकर सरकार के समक्ष पक्ष रखने की तैयारी शुरू कर दी है। राजकीय टीजीटी कला संघ के प्रदेश महासचिव विजय हीर ने कहा है कि सीबीएसई परीक्षा उत्तीर्ण सेवारत शिक्षक जल्द ही सचिवालय में मुख्यमंत्री से भेंट कर नियुक्तियां अधिसूचित नियमों के अनुसार केवल मेरिट के आधार पर किए जाने की मांग उठाएंगे। उन्होंने कहा कि सीबीएसई सब-कैडर प्रतिनियुक्ति परीक्षा-2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया के शुरुआती दिनों में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की वेबसाइट पर अभ्यर्थियों को 10 पसंदीदा स्टेशनों के विकल्प भरने की सुविधा दी गई थी, लेकिन बाद में यह विकल्प हटा दिया गया। उनका तर्क है कि यदि यह डेटा उपलब्ध रहता तो शिक्षा विभाग को पहले से ही यह स्पष्ट हो जाता कि किस विद्यालय के लिए कितने शिक्षक प्राथमिकता दे रहे हैं और काउंसलिंग प्रक्रिया कहीं अधिक सरल एवं पारदर्शी हो सकती थी।
विजय हीर ने सुझाव दिया कि अब भी चयनित शिक्षकों से ऑनलाइन माध्यम से स्टेशन वरीयता विकल्प लिए जा सकते हैं। इससे विभाग को वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी और यह स्पष्ट हो सकेगा कि मेरिट के आधार पर किन विद्यालयों में किन शिक्षकों की नियुक्ति संभावित है। साथ ही यह भी पता चल जाएगा कि किन स्कूलों में सीबीएसई सब-कैडर भर्ती नियम के तहत स्टॉप-गैप व्यवस्था के माध्यम से मौजूदा स्टाफ कार्य करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि यदि विभाग ऑनलाइन विकल्प लेकर मेरिट आधारित काउंसलिंग करवाता है तो पूरी तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी और अनावश्यक विवादों की स्थिति भी नहीं बनेगी।
बोले, नियुक्ति से वंचित करने का कानूनी आधार नहीं
प्रदेश महासचिव ने कहा कि राज्य चयन आयोग के माध्यम से होने वाली नई नियुक्तियों में भी विभिन्न प्रकार के समायोजन किए जाते हैं, लेकिन सेवारत शिक्षकों के मामले में अनावश्यक भ्रम पैदा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक परीक्षा में मेरिट के आधार पर चयनित हुए हैं और सीबीएसई विद्यालयों में सेवाएं देना चाहते हैं, उन्हें अवसर मिलना चाहिए। वहीं जो शिक्षक इस बार चयनित नहीं हो पाए हैं, वे आगामी परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं।
विजय हीर ने दावा किया कि मेरिट सूची में स्थान प्राप्त कर चुके शिक्षकों को नियुक्ति से वंचित करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि चयनित शिक्षक मुख्यमंत्री के समक्ष अपना पक्ष रखकर न्याय की मांग करेंगे। साथ ही उन्होंने बताया कि इस विषय पर उनकी उपसमिति के अध्यक्ष एवं उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से भी चर्चा हो चुकी है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार शीघ्र ही इस मामले का समाधान निकालेगी।