Himachal Weather: शिमला में झमाझम बारिश, कई इलाकों में ओलावृष्टि, प्रदेश में इतने दिन बरसेंगे बादल
शिमला में सोमवार शाम कुछ देर के लिए झमाझम बारिश हुई। इस दाैरान हल्की ओलावृष्टि भी दर्ज की की गई।
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सोमवार शाम कुछ देर के लिए झमाझम बारिश हुई। इस दाैरान हल्की ओलावृष्टि भी दर्ज की की गई। शाम चार बजे के बाद शुरू हुई भारी बारिश से नाले उफान पर आ गए। वहीं छुट्टी के बाद स्कूली बच्चे बारिश में भीगते हुए घर पहुंचे। किन्नाैर- चाैपाल में दोपहर के समय ओलावृष्टि हुई। ऊना-मंडी में भी बादल बरसे। माैसम विभाग ने अगले तीन घंटों के लिए चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, सोलन, बिलासपुर, ऊना, हमीरपुर, सिरमाैर व शिमला जिले के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है।
किन्नौर के रूपी क्षेत्र में 10 मिनट हुई ओलावृष्टि ने बरपाया कहर
निचार उपमंडल की रूपी वैली की शिगारचा पंचायत में सोमवार तड़के ओलावृष्टि ने जमकर बरपाया। पंचायत के शिगारचा, हुरुवा और डबलिंग गांव में सोमवार को करीब 10 मिनट तक भारी ओलावृष्टि हुई। ओलों ने बागवानों की कमर तोड़ कर रख दी है। भारी ओलावृष्टि से न केवल तैयार हो रही सेब फसल को बर्बाद किया, बल्कि सेब के पेड़ों की पत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसकी भरपाई दो साल तक नहीं हो पाएगी। अचानक हुई ओलावृष्टि से सेब की फसल के साथ नकदी फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। सेब की फसल के अलावा नाशपाती, अखरोट, तुलसी, कोदा, राजमा सहित अन्य दालों को भारी नुकसान पहुंचा है। बागवान हैप्पी, रघुदास, मुकेश, राजीव, सुन्नी, संजीव, वीरबल, जीवन, मनोज, अन्नू नेगी, ज्ञान प्रकाश, ठाकुर भगत, राजकुमार और आशा सहित अन्य सैकड़ों ग्रामीणों ने कहा कि कई साल की मेहनत पल भर में ही बर्बाद हो गई। ओले इतने बड़े गिरे कि कुछ ही मिनटों में बगीचों और खेतों में फसलों को व्यापक क्षति पहुंच गई। सेब के पेड़ों पर लगे फल झड़ गए हैं, वहीं कई फलों पर ओलों के निशान पड़ने से गुणवत्ता प्रभावित हो गई है। इससे बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार क्षेत्र में इतनी तीव्र ओलावृष्टि देखी है। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि कुछ राहत मिल सके। राजस्व विभाग के पटवारी रूपी रत्न नेगी ने कहा कि ओलावृष्टि से शिगारचा पंचायत में ओले से सेब और नकदी फसल से नुकसान पहुंचा है। नुकसान का आकलन करने के लिए बागवानी विभाग की टीम मौके पर रवाना हो गई है। आकलन के बाद नुकसान की सही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
#WATCH शिमला, हिमाचल प्रदेश: शहर के जाखू इलाके में बारिश और ओलावृष्टि हुई। pic.twitter.com/NcK4se66ML
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 15, 2026
इतने दिन बरसेंगे बादल
माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 16 से 21 जून के बीच राज्य के कुछ इलाकों में हल्की बारिश होने की संभावना है। 15 जून को राज्य के कुछ अलग-अगल इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। चोटियों पर हल्की बर्फबारी के आसार हैं। वहीं अगले 4-5 दिनों में राज्य के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान धीरे-धीरे 2-3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। अगले 3-4 दिनों में राज्य के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान धीरे-धीरे 2-4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ेगा। शिमला में न्यूनतम तापमान 15.0, सुंदरनगर 18.5, भुंतर 15.2, कल्पा 8.6, धर्मशाला 16.8, ऊना 18.0, नाहन 18.9, केलांग 4.4, पालमपुर 17.0, सोलन 16.4, मनाली 10.5, कांगड़ा 20.1, मंडी 16.0, बिलासपुर 19.0, चंबा 18.2, डलहाैजी 17.1, जुब्बड़हट्टी 17.8, कुफरी 11.9, कुकुमसेरी 6.1, सेऊबाग 12.4 , बरठीं 19.6, पांवटा साहिब 24.0, सराहन 17.5, देहरागोपीपुर 24.0, ताबो 11.3 व नेरी में 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीते 24 घंटों के दाैरान खदराला में 5.0, मनाली 2.0 व कुकुमसेरी में 1.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
झमाझम बारिश में सकोडी खड्ड का पानी हुआ काला, अस्पताल परिसर में भरा पानी
सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे हुई झमाझम बारिश ने शहर की सफाई और जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। करीब 20 मिनट तक हुई बारिश के दौरान तल्याहड़, दो अंब, टारना, स्कूल बाजार, अस्पताल मार्ग, पैलेस कॉलोनी और अन्य क्षेत्रों से बहकर आया गंदा पानी सकोडी खड्ड में पहुंच गया। कई दिनों से जमा कूड़ा-कचरा, रुकी सीवरेज और गंदगी पानी में मिलने से खड्ड का पानी काला पड़ गया तथा आसपास दुर्गंध फैल गई। उधर, बस अड्डा क्षेत्र से आने वाला नाला आईटीआई चौक के पास अवरुद्ध होने से गंदा पानी पुराने सुकेती पुल पर जमा हो गया। क्षेत्रीय अस्पताल में छत की निकासी पाइप बंद होने से नए और पुराने पर्ची काउंटर परिसर में पानी भर गया, जिससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी झेलनी पड़ी। अस्पताल के मुख्य द्वार के बाहर सीवरेज चैंबर जाम होने से गंदगी सड़क पर फैल गई। लोगों ने कहा कि हर बारिश में अस्पताल परिसर में पानी भरने की समस्या सामने आती है और इसके स्थायी समाधान की जरूरत है।
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