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HP High Court: सीबीएसई स्कूलों के लिए टीचर टेस्ट, पॉलिसी पर बहस पूरी; फैसला सुरक्षित

संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना। Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 23 Apr 2026 10:11 AM IST
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सार

सीबीएसई स्कूलों के लिए टीचर टेस्ट पॉलिसी मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में बुधवार को बहस पूरी हो गई है। सरकार का मानना है कि सरकारी स्कूलों को सीबीएसई स्कूलों में बदलने के लिए जो पॉलिसी लाई गई है, वह भविष्य को देखते हुए बनाई गई है। पढ़ें पूरी खबर...

HP High Court Teacher Test for CBSE Schools Arguments on Policy Concluded Verdict Reserved
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सीबीएसई स्कूलों के लिए टीचर टेस्ट पॉलिसी मामले में बुधवार को बहस पूरी हो गई है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपने फैसले को सुरक्षित रख दिया है। 

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सरकार का मानना है कि सरकारी स्कूलों को सीबीएसई स्कूलों में बदलने के लिए जो पॉलिसी लाई गई है, वह भविष्य को देखते हुए बनाई गई है। इसका मकसद शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करना है। प्रदेश सरकार बच्चों को बेहतर और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा देना चाहती है। दूसरी ओर एसोसिएशन इस टीचर टेस्ट का विरोध कर रही है। उसका मानना है कि सरकार एक वर्ग के बीच एक अन्य वर्ग पैदा कर रही है, जो संविधान के खिलाफ है। अदालत को बताया गया कि वह स्कूलों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार जिस तरीके से अध्यापकों का चयन कर रही है। वह सरासर गलत, अवैध और अन्यायपूर्ण है। 
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उन्होंने अदालत को बताया कि इस पॉलिसी के मुताबिक शिक्षकों के बीच समानता और असमानता, कम और ज्यादा अनुभव की खाई पैदा हो रही है, जो शिक्षकों के बीच हीनता  की भावना पैदा कर रही है। भविष्य में अध्यापकों की नियुक्ति और ट्रांसफर के मापदंडों भी स्पष्ट स्थिति नहीं है।

क्रिप्टोकरेंसी मामले में आरोपी को अंतरिम जमानत
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कि्रप्टोकरेंसी मामले के आरोपी विजय कुमार जुनेजा को वित्तीय कार्यों और स्वास्थ्य कारणों के आधार पर चार सप्ताह की अंतरिम जमानत मंजूर की है। न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की एकल पीठ ने यह आदेश पारित किया। शिमला की कैथू जेल में बंद याचिकाकर्ता आरोपी विजय कुमार जुनेजा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483 के तहत अंतरिम जमानत की गुहार लगाई थी। तर्क दिया कि आरोपी को अपने बैंक खातों को नियमित करने और आयकर संबंधी देनदारियों को पूरा करने के लिए व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता है। वह हृदय रोग व सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहा है।

चिकित्सकीय जांच की जरूरत है। वहीं राज्य सरकार ने जमानत का कड़ा विरोध किया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि आरोपी को जेल में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं और टैक्स संबंधी कार्यों का बहाना केवल कानून की प्रक्रिया से बचने का एक प्रयास है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले के तथ्यों को देखते हुए आरोपी को 23 अप्रैल से 21 मई 2026 तक अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने इस दौरान कड़ी शर्तें भी लगाई हैं। 
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