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Himachal: सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम इस साल भी चलेगा, जिलावार मंत्रियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 09 Jan 2026 01:45 PM IST
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सार

 तकनीकी शिक्षा एवं राजस्व मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा है कि राज्य सरकार का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम सरकार गांव के द्वार वर्ष 2026 में प्रदेश के सभी जिलों और सभी विधानसभा क्षेत्रों में लागू किया जाएगा। 

hp sarkar gaon ke dwar program will continue this year as well, with district-wise ministers assigned the resp
तकनीकी शिक्षा एवं राजस्व मंत्री राजेश धर्माणी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा एवं राजस्व मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा है कि राज्य सरकार का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम सरकार गांव के द्वार वर्ष 2026 में प्रदेश के सभी जिलों और सभी विधानसभा क्षेत्रों में लागू किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत मंत्री, वरिष्ठ विधायक और पार्टी पदाधिकारी पंचायत स्तर पर जाकर आम जनता की समस्याएं सुनेंगे और मौके पर ही उनके समाधान के निर्देश देंगे। पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए राजेश धर्माणी ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 2 जनवरी 2026 को राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक में इस कार्यक्रम का शेड्यूल दोबारा जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया था कि शासन को जनता के द्वार तक ले जाया जाएगा।

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जिलावार मंत्रियों को सौंपी गई जिम्मेदारी
मंत्री ने बताया कि सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलावार मंत्रियों और वरिष्ठ विधायकों को सौंपी गई है। चंबा में विधानसभा अध्यक्ष, कांगड़ा कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार, शिमला  पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, सिरमौर उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, किन्नौर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, मंडी लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, हमीरपुर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, लाहौल-स्पीति आयुष मंत्री राजेंद्र गोमा, कुल्लू वरिष्ठ विधायक सुंदर सिंह ठाकुर और बिलासपुर में स्वयं राजेश धर्माणी इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे।

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हर महीने दो दिन राजस्व लोक अदालतें
धर्माणी ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब प्रदेश में हर महीने दो दिन राजस्व लोक अदालतें लगेंगी। इसके अलावा प्रत्येक सप्ताह मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को म्यूटेशन, पार्टिशन और राजस्व प्रविष्टियों के सुधार के लिए विशेष अदालतों का आयोजन किया जाएगा। हर सप्ताह शनिवार को मामलों की समीक्षा होगी। एसडीएम डीसी को रिपोर्ट देंगे, इसके बाद एसीएस राजस्व द्वारा राजस्व मंत्री को ब्रीफिंग दी जाएगी। हर महीने के अंतिम सोमवार को मुख्यमंत्री स्तर पर पूरी समीक्षा की जाएगी। राजेश धर्माणी ने बताया कि अक्तूबर 2023 में शुरू किए गए विशेष राजस्व अभियान के तहत अक्तूबर 2023 से दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश में 5 लाख 10 हजार से अधिक राजस्व मामलों का निपटारा किया गया।

सेवानिवृत्त पटवारी-तहसीलदारों की सेवाएं ली जाएंगी
धर्माणी ने कहा कि राज्य में फिलहाल 451 राजस्व प्रविष्टियां लंबित हैं, जिन्हें 31 मार्च 2026 तक पूरी तरह दुरुस्त कर लिया जाएगा। 31 दिसंबर 2025 तक प्रदेश में करीब 24 हजार बंटवारे, 1.10 लाख म्यूटेशन और हजारों अन्य मामले लंबित हैं। उन्होंने बताया कि धर्मशाला स्थित सेटलमेंट ऑफिसर कार्यालय में भी लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। राजस्व मंत्री ने कहा कि प्रदेश में कई स्थानों पर राजस्व अधिकारियों के पद खाली हैं। इसे देखते हुए सरकार ने सेवानिवृत्त पटवारियों, कानूनगो और तहसीलदारों की सेवाएं लेने का निर्णय लिया है। उपायुक्तों को नियुक्ति के विशेष अधिकार दिए गए हैं और मानदेय भी बढ़ाया गया है ताकि अनुभवी अधिकारी उपलब्ध हो सकें।

31 मार्च 2026 तक ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने का लक्ष्य, पटवारी भर्ती प्रक्रिया शुरू
धर्माणी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक हिमाचल प्रदेश को ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाना है। इसके लिए इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के ग्लेशियर, नदियां और पर्यावरण सिर्फ प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण हैं। नई टाउनशिप को लेकर विपक्ष के आरोपों पर मंत्री ने कहा कि यह एक लंबी और पारदर्शी प्रक्रिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल इंपैक्ट असेसमेंट किया जा रहा है और स्थानीय लोगों की सहमति के बिना कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। धर्माणी ने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार के दौरान जमीन आवंटन में बड़े घोटाले हुए, जबकि वर्तमान सरकार पारदर्शिता और जनहित को प्राथमिकता दे रही है। राजस्व मंत्री ने बताया कि 54 पटवारियों की सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रशिक्षण पूरा होते ही इससे राजस्व मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। पदोन्नति से जुड़े मामलों में उच्च न्यायालय के निर्देशों का अध्ययन किया जा रहा है और आवश्यक निर्णय मुख्यमंत्री व मंत्रिमंडल स्तर पर लिए जाएंगे।  

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