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Video: आईजीएमसी शिमला में मरीज के गले से आठ इंच लंबी जोंक जीवित निकाली, जानें क्या बोले डाॅक्टर

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 31 Jan 2026 05:15 PM IST
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सार

आईजीएमसी शिमला के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों ने सिरमौर जिले के 55 वर्षीय मरीज सुरेश के गले में चिपकी आठ इंच लंबी जिंदा जोंक को निकाला। 

IGMC Shimla doctors removed a live, eight inch long leech from a patient's throat
डाॅक्टर डाॅ. डिंपल के भगलानी की टीम ने मरीज के गले से आठ इंच लंबी जोंक निकाली। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों ने सिरमौर जिले के 55 वर्षीय मरीज सुरेश के गले में चिपकी आठ इंच लंबी जिंदा जोंक को निकाला। मरीज की सांस की नली में वोकल कॉड के पास फंसी इस जोंक से मरीज को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। आवाज में भी बदलाव आ गया था। आईजीएमसी) शिमला के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों ने सिरमौर जिले के 55 वर्षीय मरीज सुरेश के गले में चिपकी आठ इंच लंबी जिंदा जोंक को निकाला। 

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आईजीएमसी में मरीज को लेकर ईएनटी विभाग के चिकित्सकों ने पल्मोनरी विभाग के चिकित्सकों के साथ चर्चा की। इसके बाद शुक्रवार को आईजीएमसी के पल्मोनरी विभाग के सहायक आचार्य एवं कंसलटेंट डॉ. डिंपल के. भगलानी, डॉ. राघव निरुला (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. मयूर बग्गा (जूनियर रेजिडेंट), डॉ. निशांत (जूनियर), डॉ. कुमार सौरभ (जूनियर), तकनीशियन सुभाष बाली, अर्चना की टीम ने ब्रोंकोस्कोपी और बायोप्सी में उपयोग होने वाले फोरसेप इंटरवेंशन से जोंक को पकड़ कर निकाला। चिकित्सकों ने मरीज को बिना किसी ऑपरेशन या चीरे के जिंदा जोंक को बाहर निकाल कर बड़ी राहत दी। यदि यही जोंक अंदर से बाहर निकालने में देरी होती तो इससे वह खून चूस कर और मोटी होती जिससे मरीज को गंभीर दिक्कत हो सकती थी। इससे उसकी जान को भी खतरा पैदा हो सकता था। यह विभाग के चिकित्सकों की एक बड़ी उपलब्धि है जिसमें मरीज को सुरक्षित बचा लिया गया।

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प्राकृतिक स्रोत से पानी पीने पर गले में फंसी होगी जोंक
मरीज सुरेश कुमार निवासी गांव कांगेर धरयार तहसील पच्छाद जिला सिरमौर का रहने वाला है। उन्होंने बताया कि गांव में प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी पीने के दौरान जोंक गले में चली गई होगी। सांस लेने में दिक्कत हुई तभी उन्हें गले में कुछ फंसा महसूस हुआ। इस पर वह सोलन के एमएमयू अस्पताल में आए थे। यहां वोकल कॉड के पास कुछ काले रंग का हिलता हुआ दिखाई दिया। इसके बाद उन्हें आईजीएमसी रेफर किया था। डॉ. डिंपल ने अपनी पूरी टीम के साथ मिलकर जोंक को बाहर निकालने में सफलता हासिल की। मरीज को शुक्रवार को ही कुछ टेस्ट करने के बाद छुट्टी भी दे दी गई।

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