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कांगड़ा पेंशन घोटाला: मृतकों के खातों से लाखों रुपये निकाले, शाखा डाक अधिकारी के खिलाफ सीबीआई ने दर्ज किया केस

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 15 Jun 2026 09:34 AM IST
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सार

कांगड़ा में 19 मृत लाभार्थियों के पेंशन खातों से 9.02 लाख रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि शाखा डाक अधिकारी ने फर्जी दस्तावेज और जाली अंगूठे के निशान से राशि निकाली। सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

कांगड़ा जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शाखा डाक अधिकारी पर मृतकों के पेंशन खातों से 9.02 लाख रुपये की राशि का गबन करने का आरोप है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, शिमला ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। यह घटना ग्रामीण बैंकिंग और सरकारी लाभ वितरण प्रणाली की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।


आरोप है कि डाक मंडल धर्मशाला के मंड मंजवां शाखा डाकघर में 2012 से तैनात शाखा डाकपाल होशियार सिंह ने पिछले कुछ समय में 19 मृत लाभार्थियों के पेंशन खातों से सरकारी राशि निकाली। यह गबन 6 जून 2024 से 13 सितंबर 2025 के बीच किया गया। आरोप है कि डाकपाल ने फर्जी निकासी प्रपत्र और अंगूठों के जाली निशान का इस्तेमाल कर इन खातों से कुल 9.02 लाख रुपये निकाले। यह राशि कथित तौर पर निजी लाभ के लिए इस्तेमाल की गई।
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सीबीआई की कार्रवाई
सूचना मिलने पर, सीबीआई ने मामले का गोपनीय सत्यापन किया। जांच में साक्ष्य मिलने के बाद, केंद्रीय एजेंसी ने केस दर्ज किया है। इस मामले की जांच सीबीआई के पुलिस अधीक्षक राजेश चहल के निर्देश पर जांच निरीक्षक अंकुर शर्मा को सौंपी गई है।
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आगे की जांच और संभावित लापरवाही
जांच एजेंसी अब बैंक और डाक विभाग के वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही है। डिजिटल लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की भी गहन पड़ताल की जा रही है। सीबीआई यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गबन में कोई अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल थे। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या विभागीय स्तर पर कोई लापरवाही बरती गई, जिससे इस तरह के गबन को अंजाम दिया जा सका।

व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना सरकारी योजनाओं के तहत जरूरतमंदों तक पहुंचने वाली सहायता राशि के दुरुपयोग को उजागर करती है। यह दर्शाता है कि किस प्रकार कुछ भ्रष्ट अधिकारी जनधन का दुरुपयोग कर सकते हैं और सरकारी तंत्र की कमियों का फायदा उठा सकते हैं। इस मामले से सरकारी लाभ वितरण व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता और कड़ी निगरानी की आवश्यकता पर बल मिलता है।
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