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Kangra Teacher Compulsory Retirement: शराब पीकर स्कूल आने और छात्रों से मारपीट के दोषी शिक्षक पर बड़ी कार्रवाई
Thu, 06 Aug 2026 12:47 PM IST
Ankesh Dogra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 06 Aug 2026 12:47 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने कांगड़ा में तैनात एक टीजीटी शिक्षक को विभागीय जांच में शराब के नशे में स्कूल आने, छात्रों से मारपीट, अभद्र व्यवहार और बिना अनुमति अनुपस्थित रहने के आरोप सिद्ध होने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है। विभाग ने इसे गंभीर कदाचार मानते हुए 31 जुलाई 2026 से आदेश लागू कर दिए हैं।
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शिक्षा विभाग हिमाचल प्रदेश।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने सरकारी शिक्षक के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) देने के आदेश जारी किए हैं। विभागीय जांच में शिक्षक पर स्कूल में शराब के नशे में आने, सरकारी दायित्वों की अनदेखी करने, बिना अनुमति अनुपस्थित रहने तथा छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट करने के आरोप सिद्ध पाए गए। इसके बाद शिक्षा निदेशालय ने केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत यह कार्रवाई की है।
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जारी आदेशों के अनुसार, मोहिंदर सिंह, जो पहले चंबा जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालय रांभो में टीजीटी (नॉन मेडिकल) के पद पर कार्यरत थे और वर्तमान में राजकीय उच्च विद्यालय कंड, जिला कांगड़ा में तैनात थे, के खिलाफ 20 मार्च 2025 को विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी। आरोप था कि वह कई बार शराब के नशे में स्कूल पहुंचे, अपने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया, बिना अनुमति अनुपस्थित रहे तथा छात्रों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मारपीट भी की।
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शिक्षक ने अपने जवाब में सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से अग्नाशय और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं तथा उनके खिलाफ शिकायत झूठी और दुर्भावनापूर्ण है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रारंभिक जांच निष्पक्ष नहीं थी और उनके खिलाफ प्रस्तुत वीडियो से छेड़छाड़ की गई थी। हालांकि विभाग ने उनके स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना और नियमित विभागीय जांच कराने का निर्णय लिया। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद शिक्षक को अंतिम पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया, लेकिन विभाग ने उनके तर्कों को पर्याप्त नहीं माना।
शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में कहा कि एक सरकारी शिक्षक से अनुशासन, ईमानदारी और विद्यार्थियों के लिए आदर्श आचरण की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में छात्रों के साथ दुर्व्यवहार और नशे की हालत में विद्यालय पहुंचना गंभीर कदाचार है। विभाग ने सभी तथ्यों, सेवा अवधि और स्वास्थ्य संबंधी दलीलों पर विचार करने के बाद बर्खास्तगी या सेवा से हटाने के बजाय 31 जुलाई 2026 से अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड लागू करने का निर्णय लिया। साथ ही आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षक के पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रचलित नियमों के अनुसार दिए जाएंगे।
शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में कहा कि एक सरकारी शिक्षक से अनुशासन, ईमानदारी और विद्यार्थियों के लिए आदर्श आचरण की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में छात्रों के साथ दुर्व्यवहार और नशे की हालत में विद्यालय पहुंचना गंभीर कदाचार है। विभाग ने सभी तथ्यों, सेवा अवधि और स्वास्थ्य संबंधी दलीलों पर विचार करने के बाद बर्खास्तगी या सेवा से हटाने के बजाय 31 जुलाई 2026 से अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड लागू करने का निर्णय लिया। साथ ही आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षक के पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रचलित नियमों के अनुसार दिए जाएंगे।