कुल्लू रिश्वत मामला: हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी की कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा सुरक्षित रखने के दिए आदेश
न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कुल्लू की निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी महिला अधिकारी ने पुलिस अधिकारियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग को लेकर एक अर्जी दाखिल की थी, इसे खारिज कर दिया गया था।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कुल्लू रिश्वत कांड में फंसे आरोपी अधिकारी के मामले में जांच करने वाले सभी अधिकारियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और पिन प्वाइंट कॉल लोकेशन डाटा (सीएलडी) को सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कुल्लू की निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी महिला अधिकारी ने पुलिस अधिकारियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग को लेकर एक अर्जी दाखिल की थी, इसे खारिज कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि हर आरोपी को अपनी बेगुनाही साबित करने का उचित अवसर मिलना चाहिए। कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन डाटा जैसे डिजिटल साक्ष्य सच्चाई को सामने लाने में मदद करेंगे और इससे अभियोजन पक्ष को कोई नुकसान नहीं होगा।
अदालत ने यह भी कहा कि क्योंकि मोबाइल ऑपरेटर आमतौर पर केवल दो साल के लिए ही डेटा सुरक्षित रखते हैं, इसलिए इस महत्वपूर्ण साक्ष्य को अभी सुरक्षित करना न्याय के हित में है। गौरतलब है 7 फरवरी 2025 में स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो कुल्लू ने खाद्य सुरक्षा विभाग की तत्कालीन सहायक आयुक्त और अन्य कर्मियों को एक होटल व्यवसायी से रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। पुलिस ने सहायक खाद्य आयुक्त (असिस्टेंट फूड कमिश्नर) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस का आरोप है कि आरोपी महिला ने दोपहर 1 बजे अपने सहकर्मी को फोन कर शिकायतकर्ता से रिश्वत लेने के निर्देश दिए थे। आरोपी को शाम 5:40 बजे गिरफ्तार किया गया और उसका फोन दोपहर बाद जब्त किया गया।
आरोपी महिला अधिकारी ने अदालत में दलील दी कि उन्हें पुलिस ने दोपहर 1 बजे नहीं, बल्कि सुबह 11:30 बजे ही हिरासत में ले लिया था और उनका फोन भी उसी समय जब्त कर लिया गया था। आरोपी का तर्क है कि यदि फोन 11:30 बजे पुलिस के पास था, तो वह दोपहर 1 बजे रिश्वत के लिए कॉल कैसे कर सकती थी। इसी विरोधाभास को साबित करने के लिए उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 के तहत डेटा सुरक्षित रखने की मांग की थी।आरोपी अधिकारी ने अदालत से मांग की थी कि जांच में शामिल पुलिस अधिकारियों के सीडीआर और टावर लोकेशन को सुरक्षित रखा जाए।
वहीं, राज्य सरकार ने यह कहते हुए अर्जी का विरोध किया था कि पुलिस अधिकारियों के सीडीआर सार्वजनिक करने से उनके गुप्त सूचना स्रोतों का खुलासा हो सकता है और उनकी निजता का उल्लंघन होगा। सरकार ने कोर्ट को बताया कि मुख्य आरोपी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच अभी लंबित है। यह जांच उसी अधिकारी की ओर से की जा रही है जिसके सीडीआर की मांग आरोपी पक्ष कर रहा है। विजिलेंस ने स्पष्ट किया कि प्री-ट्रैप मेमो सर्किट हाउस कुल्लू में बना और पोस्ट-ट्रैप कार्रवाई सहायक आयुक्त के कार्यालय में हुई। इसलिए टावर लोकेशन रिपोर्ट का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता।