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LPG Issue: हिमाचल के बॉटलिंग प्लांटों में नहीं किल्लत, टैंकों में 400 मीट्रिक टन एलपीजी माैजूद

आदित्य चड्ढा, संवाद न्यूज एजेंसी, बरोटीवाला(सोलन)। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 13 Mar 2026 05:00 AM IST
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सार

दोनों प्लांट के पास अभी भी करीब 400 मीट्रिक टन गैस टैंकों में पड़ी है, जो पूरे प्रदेश के लिए तीन दिन में सिलिंडर सप्लाई कर देगी।

LPG crisis No shortage at bottling plants, 400 metric tonnes of LPG gas in tanks
डिलीवरी के लिए तैयार घरेलू एलपीजी सिलिंडर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बद्दी व बरोटीवाला के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में घरेलू गैस की कोई किल्लत नहीं है। दोनों प्लांट के पास अभी भी करीब 400 मीट्रिक टन गैस टैंकों में पड़ी है, जो पूरे प्रदेश के लिए तीन दिन में सिलिंडर सप्लाई कर देगी। वहीं उन्हें लगातार सप्लाई भी पहुंच रही है। हालांकि, अभी दोनों प्लांटों में व्यावसायिक सिलिंडरों को नहीं भरा जा रहा है। केवल स्कूल में मिड-डे मील व अस्पतालों के लिए सिलिंडर भरे जा रहे हैं। व्यावसायिक सिलिंडरों के भरने पर रोक के बाद यहां पर 20 फीसदी गैस की बचत हो रही है, जो घरेलू गैस सिलिंडरों में भरी जा रही है।

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बद्दी के जुड्डी कलां व बरोटीवाला के टिपरा में एलपीजी के बॉटलिंग प्लांट है। अभी यहां पर एलपीजी गैस मांग के अनुसार आ रही है। बद्दी में पहले 35 व टिपरा में 8 ट्रक हर रोज गैस सिलिंडरों के जाते थे। अब व्यवसायिक सिलिंडरों की रिफिलिंग पर रोक लगने से बद्दी में 28 व बरोटीवाला में 6 ट्रक ही भरे जा रहे हैं। व्यावसायिक सिलिंडरों पर रोक लगने के बाद रोजाना 9 ट्रक गैस की बचत हो रही है। सिलिंडरों की ब्लैक मार्केटिंग न हो, इसके लिए मांग के अनुसार ही सिलिंडर भेजे जा रहे हैं। अतिरिक्त कोई भी सिलिंडर प्लांट से नहीं भेजा रहा है।

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गैस प्लांट के प्रबंधकों ने बताया कि अभी व्यवसायिक सिलिंडर भरने की पूरी तरह से पाबंदी है। केवल स्कूल, काॅलेज व अस्पताल की मांग पर उन्हें भरा जा रहा है। इसके अलावा उद्योगों व संस्थानों के लिए सप्लाई को नहीं भेजा जा रहा। नए आदेश आते ही सप्लाई को चालू कर दिया जाएगा। 
 

बीबीएन में व्यावसायिक सिलिंडरों की कालाबाजारी
बद्दी, बरोटीवाला व नालागढ़ में व्यावसायिक सिलिंडरों की कमी के चलते कई उद्योगपति बाहरी राज्यों से ब्लैक में सिलिंडर लेकर आ रहे हैं। वहीं बद्दी में ब्लैक में सिलिंडर सरेआम बिक रहे हैं। जो सिलिंडर पहले 1800 में मिलता था, अब वह 3500 से लेकर 4000 तक मिल रहा है। बद्दी की कंपनियों में कामगारों को भोजन परोसने के लिए ब्लैक में सिलिंडर खरीद कर तीन दिन का स्टाॅक रखा गया है।

लकड़ी जलाकर करना पड़ेगा काम: मोहन जांगड़ा
वर्धमान कंपनी के सहायक उपाध्यक्ष मोहन जांगड़ा ने बताया कि उन्हें सिलिंडर नहीं मिल रहे। कामगार बिना भोजन के काम कैसे करेंगे। इसके लिए अभी कंपनी में लकड़ी जलाकर खाना तैयार करना पड़ेगा।

ढाबों में चाय, समोसा व खाने के रेट बढ़े
वहीं, ढाबों में सिलिंडर न मिलने पर संचालकों ने खाने के रेट भी बढ़ा दिए हैं। ढाबों में जहां चाय 10 रुपये की मिलती थी, अब वह 15 की हो गई है। समोसा भी 10 से 15 पहुंच गया है। खाने के रेट भी बढ़ा दिए गए हैं।

सिलिंडर न मिलने पर लकड़ी के चूल्हों पर लंगर बनाने की योजना
व्यावसायिक सिलिंडरों की कमी का असर चैत्र नवरात्र के मेलों पर देखने को न मिले, इसके लिए कांगड़ा जिले की तीन शक्तिपीठाें के प्रशासन ने पहले ही तैयारियां करना शुरू कर दी हैं। कांगड़ा के बज्रेश्वरी देवी मंदिर में आगामी नवरात्र और रोजाना की लंगर व्यवस्था को लेकर मंदिर प्रशासन ने 160 सिलिंडरों की प्री बुकिंग करवा दी है। वहीं, सिलिंडर न मिलने की सूरत में ज्वालामुखी मंदिर और श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम में लकड़ी के चूल्हों पर खाना पकाने की योजना है।

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