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Himachal: 500 करोड़ के क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में मासूम जुनेजा शिमला से गिरफ्तार, 2.48 लाख निवेशकों से ठगी

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 16 Jun 2026 05:00 AM IST
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सार

 प्रवर्तन  निदेशालय की टीम ने सोमवार को शिमला में विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा के ठिकानों पर छापा मारा।

Masoom Juneja arrested from Shimla in 500 crore cryptocurrency scam; 2.48 lakh investors defrauded.
हिमाचल क्रिप्टोकरेंसी ठगी। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हिमाचल प्रदेश और पंजाब में फैले करीब 500 करोड़ रुपये के कथित क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। निदेशालय की टीम ने सोमवार को शिमला में विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा के ठिकानों पर छापा मारा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय अभिलेख जब्त किए गए। जांच के बाद ईडी ने मुख्य आरोपी सुभाष का वित्तीय मददगार और राजदार मासूम जुनेजा को धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार कर लिया है। इस पूरे मामले में ईडी की ओर से की गई यह पहली गिरफ्तारी है।

फर्जी डोमेन का उपयोग किया

मासूम जुनेजा को ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया है। वर्ष 2018 में मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा ने हेमराज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा और राधिका शर्मा के साथ मिलकर पोंजी स्कीम योजना शुरू की। प्रारंभिक चरण में ऑनलाइन मंच के माध्यम से निवेश जुटाया गया। बाद में पूरे नेटवर्क को डिजिटल ओशन के विदेशी सर्वरों पर स्थानांतरित कर दिया गया। इसके संचालन के लिए फर्जी डोमेन का उपयोग किया गया। आरोपियों ने कोर्वियो सिक्का (केआरओ) नामक डिजिटल टोकन में निवेश पर भारी मुनाफे का दावा किया।

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देशभर में भ्रामक संगोष्ठियां और अभियान चलाए

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए देशभर में भ्रामक संगोष्ठियां और अभियान चलाए गए। इस नेटवर्क के जरिये लगभग 2.48 लाख लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया गया। इस योजना से जुड़ी कुल लेनदेन राशि 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक पाई गई है, जिसका भारतीय मूल्य लगभग 500 करोड़ रुपये बैठता है। मासूम जुनेजा की गिरफ्तारी के बाद ईडी अब जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों, बैंकिंग अभिलेखों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कर रही है। जांच एजेंसी का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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घोटाले का तरीका और मुख्य आरोपी

जांच में सामने आया कि यह पूरी योजना एक क्लासिक पोंजी संरचना पर आधारित थी। इसमें नए निवेशकों से प्राप्त धन का उपयोग पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए किया जाता था। जैसे-जैसे निवेशकों की संख्या बढ़ती गई, नेटवर्क का आकार भी बढ़ता गया। शिकायतें बढ़ने पर आरोपियों ने अपने डिजिटल निशान मिटाने के लिए अभिलेख और डोमेन तक हटा दिए। मामले के उजागर होने के बाद मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा भारत छोड़कर दुबई भाग गया। आशंका है कि वह वहीं से अपने नेटवर्क को संचालित कर रहा है।

धन शोधन और संपत्ति खरीद

धन शोधन की जांच में ईडी को पता चला कि ठगी से अर्जित रकम का एक हिस्सा विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा तक पहुंचाया जाता था। अधिनियम की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों में यह तथ्य सामने आया। सुभाष शर्मा की ओर से बड़ी मात्रा में नकदी इन दोनों तक पहुंचाई गई थी। इस धन का उपयोग विभिन्न अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। कई मामलों में संपत्तियों की वास्तविक कीमत से काफी कम मूल्य पर रजिस्ट्री करवाई गई। शेष भुगतान नकद में किया गया, जिससे अवैध धन को वैध दिखाया जा सके। जुनेजा परिवार कई ऐसे बैंक खातों में नामित व्यक्ति बना हुआ था जो उनके कर्मचारियों के नाम पर थे। इन खातों का वास्तविक नियंत्रण विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा के पास था। इन्हें अपराध से अर्जित आय को छिपाने और स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

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