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Shimla News: नक्शों की फीस सरकार के खजाने में जमा करने के फैसले पर गरमाई सियासत
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भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के पार्षदों ने भी सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, कहा-यह पैसा नहीं मिला तो कैसे होगा विकास
पूर्व डिप्टी मेयर ने महापौर पर कसा तंज, बोले-पीएम और सांसदों को पत्र लिखने की जगह पहले मुख्यमंत्री से करें बात
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में भवनों के नक्शों और कंपलीशन तक की फीस अब नगर निगम की बजाय सरकार के खजाने में जमा करने के सरकार के फैसले पर सियासत गरमा गई है। भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के पार्षदों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
पूर्व डिप्टी मेयर, पूर्व पार्षदों से लेकर दोनों पार्टियों के पार्षद एक सुर में कह रहे हैं कि अगर सरकार को यह निर्णय लेना ही था तो नगर निगम के काम संभाले। पार्षदों ने कहा कि शहर में ही सचिवालय है। मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक दिन-रात यहीं बैठते हैं। ऐसे में सचिवालय से ही नगर निगम चलाया जाए। शहर में की जाने वाली सफाई, टैक्स समेत जनता के रोजमर्रा के कार्यों की जिम्मेवारी भी संभालें। कहा कि सरकार के इस फैसले ने नगर निगम बर्बाद हो जाएगा। करोड़ों रुपये कमाई घटने से विकास पर असर पड़ेगा।
नगर निगम की वास्तुकार शाखा के तहत भवनों के नए नक्शे, रिवाइज नक्शे, चेंज ऑफ लैंड यूज, कंपाउंडिंग, कंपलीशन और बिजली अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) दी जाती है। इसके एवज में नगर निगम शहरवासियों से फीस वसूल करता है। इससे नगर निगम को सालाना करीब 4 से 5 करोड़ रुपये प्राप्त होते हैं। इस साल यह कमाई छह करोड़ तक पहुंच सकती थी लेकिन अब नए निर्देशों के बाद निगम को यह पैसा नहीं मिलेगा। भाजपा पार्षद कमलेश मेहता ने सरकार के फैसले पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि अगर निगम से सभी अधिकार और आय छीन ली जाएगी तो नगर निगम का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। कहा कि अगर सफाई से लेकर हर काम निगम करेगा और आमदनी सरकार ले जाएगी तो सरकार ही शहर चला ले। भाजपा पार्षद आशा शर्मा ने कहा कि इस फैसले से नगर निगम की आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित होगी। कहा कि जब आमदनी ही नहीं बचेगी तो निगम क्या करेगा? रोजमर्रा के काम और आम जनता को मिलने वाली सुविधाओं का क्या होगा? भाजपा पार्षद सरोज ठाकुर ने कहा कि यह व्यवस्था परिवर्तन है। वास्तुकार शाखा को टीसीपी के अधीन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आगे और बदलाव देखने को मिलेंगे। कांग्रेस की पार्षद सिमी नंदा ने कहा कि जब निगम को नक्शों की फीस से आय ही नहीं मिलनी है तो वास्तुकार शाखा को चलाने का अतिरिक्त बोझ भी नगर निगम पर नहीं डालना चाहिए।
पूर्व उप महापौर राकेश कुमार शर्मा ने तो सरकार के साथ-साथ महापौर सुरेंद्र चौहान पर तंज कसते हुए कहा कि वह पीएम और सांसदों को पत्र लिखना छोड़ दें और पहले निगम की आय के स्रोत को सरकार के अधीन लेने के बारे में पहले मुख्यमंत्री से बात करें। अब निगम के पास कुछ नहीं बचा है। पूर्व पार्षद विवेक शर्मा ने कहा कि सरकार संविधान की बात करती है लेकिन दूसरी ओर नगर निगम को अनाथ बनाने का काम कर रहे हैं। सरकार इस अधिसूचना को वापस ले।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में भवनों के नक्शों और कंपलीशन तक की फीस अब नगर निगम की बजाय सरकार के खजाने में जमा करने के सरकार के फैसले पर सियासत गरमा गई है। भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के पार्षदों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
पूर्व डिप्टी मेयर, पूर्व पार्षदों से लेकर दोनों पार्टियों के पार्षद एक सुर में कह रहे हैं कि अगर सरकार को यह निर्णय लेना ही था तो नगर निगम के काम संभाले। पार्षदों ने कहा कि शहर में ही सचिवालय है। मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक दिन-रात यहीं बैठते हैं। ऐसे में सचिवालय से ही नगर निगम चलाया जाए। शहर में की जाने वाली सफाई, टैक्स समेत जनता के रोजमर्रा के कार्यों की जिम्मेवारी भी संभालें। कहा कि सरकार के इस फैसले ने नगर निगम बर्बाद हो जाएगा। करोड़ों रुपये कमाई घटने से विकास पर असर पड़ेगा।
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नगर निगम की वास्तुकार शाखा के तहत भवनों के नए नक्शे, रिवाइज नक्शे, चेंज ऑफ लैंड यूज, कंपाउंडिंग, कंपलीशन और बिजली अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) दी जाती है। इसके एवज में नगर निगम शहरवासियों से फीस वसूल करता है। इससे नगर निगम को सालाना करीब 4 से 5 करोड़ रुपये प्राप्त होते हैं। इस साल यह कमाई छह करोड़ तक पहुंच सकती थी लेकिन अब नए निर्देशों के बाद निगम को यह पैसा नहीं मिलेगा। भाजपा पार्षद कमलेश मेहता ने सरकार के फैसले पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि अगर निगम से सभी अधिकार और आय छीन ली जाएगी तो नगर निगम का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। कहा कि अगर सफाई से लेकर हर काम निगम करेगा और आमदनी सरकार ले जाएगी तो सरकार ही शहर चला ले। भाजपा पार्षद आशा शर्मा ने कहा कि इस फैसले से नगर निगम की आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित होगी। कहा कि जब आमदनी ही नहीं बचेगी तो निगम क्या करेगा? रोजमर्रा के काम और आम जनता को मिलने वाली सुविधाओं का क्या होगा? भाजपा पार्षद सरोज ठाकुर ने कहा कि यह व्यवस्था परिवर्तन है। वास्तुकार शाखा को टीसीपी के अधीन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आगे और बदलाव देखने को मिलेंगे। कांग्रेस की पार्षद सिमी नंदा ने कहा कि जब निगम को नक्शों की फीस से आय ही नहीं मिलनी है तो वास्तुकार शाखा को चलाने का अतिरिक्त बोझ भी नगर निगम पर नहीं डालना चाहिए।
पूर्व उप महापौर राकेश कुमार शर्मा ने तो सरकार के साथ-साथ महापौर सुरेंद्र चौहान पर तंज कसते हुए कहा कि वह पीएम और सांसदों को पत्र लिखना छोड़ दें और पहले निगम की आय के स्रोत को सरकार के अधीन लेने के बारे में पहले मुख्यमंत्री से बात करें। अब निगम के पास कुछ नहीं बचा है। पूर्व पार्षद विवेक शर्मा ने कहा कि सरकार संविधान की बात करती है लेकिन दूसरी ओर नगर निगम को अनाथ बनाने का काम कर रहे हैं। सरकार इस अधिसूचना को वापस ले।
