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Shimla News: पर्यटन नगरी कुफरी में सैलानियों से लूट, 100 में मिल रही मैगी, 30 रुपये में अंडा

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 01 Feb 2026 11:57 PM IST
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extra charges from tourits
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बर्फबारी के सीजन में वसूले जा रहे मनमाने दाम, सैलानियों ने उठाए सवाल, बोले-स्थानीय प्रशासन को करनी चाहिए जांच
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इन दिनों बर्फबारी देखने के लिए कुफरी पहुंच रहे हजारों सैलानी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के साथ लगते पर्यटन नगरी कुफरी में बर्फबारी देखने उमड़ रहे सैलानियों से खाने-पीने के सामान के मनमाने दाम वसूल कर जमकर लूट की जा रही है। इससे सैलानी ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
सड़क किनारे लगे ढाबों और अस्थायी दुकानों पर खाने-पीने की चीजों के दो से तीन गुना दाम वसूले जा रहे हैं। बाकायदा इसकी रेट लिस्ट भी लगाई गई है। मनमाने दाम वसूलने पर जिला प्रशासन का कोई चेक नहीं है जिससे दुकानदारों को लूट की खुली छूट मिल गई है। हालत यह है कि आम दिनों में 30 से 50 रुपये में मिलने वाली पकी हुई एक पैकेट मैगी अब 100 रुपये में मिल रही है। वहीं, एक उबला अंडा 30 रुपये में बेचा जा रहा है। इसी तरह एक कप चाय 30 रुपये और चीज बर्गर 150 रुपये में बेचा रहा है। इसके अलावा कुछ टैक्सी चालक यहां सैलानियों को घुमाने के नाम पर भी मनमाना किराया ले रहे हैं। कुफरी में अभी काफी बर्फ है और इसे देखने के लिए रोजाना हजारों सैलानी यहां पहुंच रहे हैं। बर्फबारी और स्नो एक्टिविटीज का आनंद लेने आए पर्यटकों का कहना है कि ठंड और दुर्गम हालात का फायदा उठाकर दुकानदार मनमाने दाम वसूल रहे हैं। कई पर्यटकों ने बताया कि कोई और विकल्प न होने के कारण उन्हें मजबूरी में ज्यादा पैसा देना पड़ रहा है।
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बर्फबारी के कारण सामान पहुंचाना भी मुश्किल : कारोबारी
कुछ कारोबारियों का तर्क है कि बर्फबारी के कारण सप्लाई महंगी हो जाती है। परिवहन और मजदूरी का खर्च बढ़ जाता है। इसलिए कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं। दूसरी ओर उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि लागत के नाम पर कई गुना ज्यादा वसूली करना सीधा शोषण है और यह उपभोक्ता संरक्षण नियमों का उल्लंघन है। तय दरों से अधिक वसूली पाए जाने पर जुर्माना, चालान और दुकान बंद करने जैसी कार्रवाई का प्रावधान है। कुफरी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल पर इस तरह की मनमानी न केवल पर्यटकों के अनुभव को खराब कर रही है बल्कि प्रदेश की पर्यटन छवि पर भी बुरा असर डाल रही है।
हम तय नहीं करते रेट : धीमान
जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक नरेंद्र धीमान ने कहा कि विभाग खाने-पीने और फास्ट फूड की चीजों के रेट तय नहीं करता है। इससे जुड़ा मामला अदालत में भी अभी विचाराधीन है।
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