Himachal: पेंशनरों को बकाया राशि का 40 फीसदी भुगतान 31 जुलाई तक, सीएम ने बैठक में दिया आश्वासन
1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को बकाया पेंशन राशि का 40 फीसदी भुगतान 31 जुलाई तक देने और और शेष राशि को किस्तों में देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को बकाया पेंशन राशि का 40 फीसदी भुगतान 31 जुलाई तक देने और और शेष राशि को किस्तों में देने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही लंबित पड़े चिकित्सा बिलों का भुगतान करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को सचिवालय में पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के साथ की, जिसमें पेंशनरों की मांगों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में हिमाचल पथ परिवहन निगम के पेंशनरों के साथ अलग से बैठक करने की बात कही, वहीं बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को ओपीएस बहाली को लेकर चर्चा की गई।
बैठक में इन मांगों पर हुआ विचार विमर्श
बैठक में पथ परिवहन के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को महीने की पहली तारीख को पेंशन देने के बारे में स्थायी समाधान करने और पचास हजार रुपये की पहली किस्त अदा करने बारे में विचार विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि विभागाध्यक्षों को चार दिनों के भीतर चतुर्थ श्रेणी के पेंशनर्स के बकाया का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सुक्खू ने कहा कि सरकार ने प्रदेश मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का निर्णय लिया, जबकि केंद्र सरकार की ओर से एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लागू करने के लिए बार-बार दबाव डाला जा रहा है। राज्य सरकार हर स्थिति में ओपीएस के लाभ जारी रखेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के ओपीएस को लागू करने के निर्णय के परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने राज्य को दी जाने वाली 1600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता पर रोक लगा दी है।
राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से प्रति वर्ष 8,000 से 10,000 करोड़ का नुकसान: सीएम
इसके अलावा, वर्ष 1952 से राज्य को मिल रहे राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को भी बंद कर दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य को प्रति वर्ष 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर, महासचिव इंद्र पाल शर्मा, अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा, बृज लाल ठाकुर, चमन भाटिया, देवी लाल ठाकुर, शिव सिंह सेन, हरमेश राणा, मदन लाल शर्मा, अमोलक राम, नीलम चौहान, गुरदयाल सिंह, रविंद्र सिंह राणा, मोहन लाल ठाकुर, सेन राम नेगी, सेठ राम, दीप राज वर्मा, गंगा राम शर्मा, सुरेंद्र ठाकुर, हेम सिंह ठाकुर, ओपी चौहान, प्रभु राम वर्मा, सुरेंद्र वर्मा, विनोद सूद, संदेश शर्मा, रमा चंदेल, मीरा ठाकुर सहित अन्य ने भाग लिया। संघ ने चेतावनी दी कि अगर 15 अगस्त 2026 तक उपरोक्त लिए गए निर्णयों को सरकार कार्यान्वित नहीं करती है तो अगला संघर्ष जारी रहेगा।
70 वर्ष से अधिक आयु के नगर पालिका पेंशनभोगियों को मिलेगा एरियर
उधर, प्रदेश उच्च न्यायालय ने नगर पालिका के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने वित्त विभाग की ओर से जारी 19 जून 2025 के ज्ञापन के तहत 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के पेंशनभोगियों को उनके कुल बकाया का 30 फीसदी हिस्सा का भुगतान किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो याचिकाकर्ता जून 2025 के ज्ञापन के तहत 70 वर्ष की आयु के नहीं हुए हैं, उनके हितों और पेंशन संबंधी दावों का फैसला माननीय खंडपीठ के समक्ष लंबित मधु देष्टा मामले के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि नगर पालिका कर्मचारियों की पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य लाभों को हिमाचल प्रदेश नगर पालिका कर्मचारी नियम, 2000 के तहत निदेशालय स्तर पर नियंत्रित किया जाए और अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह संशोधित वेतनमान का लाभ समय पर दिया जाए।
सीएम से मिले वोकेशनल शिक्षक, मानदेय बढ़ाने और सेवा शर्तों में सुधार की उठाई मांग
वहीं प्रदेश के वोकेशनल शिक्षकों के लिए सकारात्मक नीति बनने की उम्मीद एक बार फिर मजबूत हुई है। बुधवार को प्रदेश वोकेशनल ट्रेनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण मेघटा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात कर व्यावसायिक शिक्षकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल में को-प्रेसिडेंट मोनिका ठाकुर (महिला विंग), वाइस प्रेसिडेंट सुचिता शर्मा (महिला विंग), वाइस प्रेसिडेंट शैलेन्द्र कुमार, महासचिव विजय कुमार सहित अन्य राज्य पैनल सदस्य शामिल रहे। इस दौरान संघ की ओर से मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपा गया, जिसमें व्यावसायिक शिक्षकों के लिए स्थायी और सकारात्मक नीति लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण मेघटा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मांगों पर तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को मामले का परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार जल्द ही व्यावसायिक शिक्षकों के हित में ठोस निर्णय लेगी
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही व्यावसायिक शिक्षकों के हित में ठोस निर्णय लेगी। बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा कंपनियों को दिए जाने वाले 14 प्रतिशत मैनेजमेंट चार्ज को कम करने का रहा। प्रतिनिधिमंडल ने तर्क दिया कि अधिक मैनेजमेंट चार्ज के कारण शिक्षकों को मिलने वाला मानदेय प्रभावित हो रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए मैनेजमेंट चार्ज को घटाकर दो प्रतिशत तक लाने की बात कही। साथ ही व्यावसायिक शिक्षकों का मानदेय बढ़ाने के विषय पर भी सहमति जताई गई। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह से भी मुलाकात की। मंत्री ने भी व्यावसायिक शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया। वोकेशनल शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यदि मैनेजमेंट चार्ज में कटौती और मानदेय वृद्धि संबंधी निर्णय लागू होते हैं तो इससे प्रदेशभर के हजारों व्यावसायिक शिक्षकों को सीधा लाभ मिलेगा।