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RLA Bilaspur Scam: बिलासपुर में सेकंड हैंड गाड़ियों के दो साल में हुए पंजीकरण का रिकॉर्ड तलब, जानें विस्तार से

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 30 Jan 2026 05:00 AM IST
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सार

स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने दो साल में हुए सेकंड हैंड गाड़ियों की पंजीकरण की रिपोर्ट तलब की है। इस मामले की जांच के लिए स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। पढ़ें पूरी खबर...

Records of second-hand vehicle registrations in Bilaspur over the past two years have been summoned
आरएलए बिलासपुर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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सोलन और बिलासपुर में वाहनों के फर्जी पंजीकरण और सत्यापन मामले में प्रदेश सरकार ने एसडीएम से रिकॉर्ड तलब किया है। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने दो साल में हुए सेकंड हैंड गाड़ियों की पंजीकरण की रिपोर्ट तलब की है। परिवहन विभाग को आशंका है कि अन्य जिलों में भी वाहनों के फर्जी पंजीकरण का खेल हो सकता है। प्रदेश सरकार ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस मामले की जांच के लिए स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। यह कमेटी मामले की जांच कर रही है।

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बिलासपुर में सबसे पहले वाहनों के फर्जी पंजीकरण के मामले सामने आए हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में बिलासपुर में तैनात एक वरिष्ठ सहायक को गिरफ्तार किया। दिल्ली क्राइम ब्रांच लंबे समय से एक अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह की तलाश कर रही थी। इसी दौरान पुलिस अधिकारियों को बिलासपुर से जुड़े अहम सुराग हाथ लगे।

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जांच में पता चला कि दिल्ली और अन्य राज्यों से चोरी की गईं गाड़ियों को बिलासपुर आरएलए में फर्जी कागजातों के जरिये फर्स्ट हैंड दिखाकर पंजीकृत किया जा रहा था। जब क्राइम ब्रांच ने संदिग्ध वाहनों के रिकॉर्ड और वैध दस्तावेज मांगे, तो संबंधित वरिष्ठ सहायक उन्हें प्रस्तुत करने में असफल रहा। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। कर्मचारी पहले आरएलए शाखा में डीलिंग हैंड के पद पर तैनात था। आरोप है कि इसी दौरान उसने नियमों की अनदेखी करते हुए चोरी की गाड़ियों के चेसिस नंबर और दस्तावेजों में हेरफेर की।

सोलन में भी वाहनों के फर्जी सत्यापन का मामला सामने आया है। आरएलए की शिकायत पर इस मामले में भी पुलिस ने मामला दर्ज किया है। आरएलए के एक लिपिक की ई वाहन पोर्टल की लॉगइन आईडी को बाहर से एक्सेस किया जा रहा था और कोई शातिर खुद वाहनों की वेरिफिकेशन कर रहा था। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) नरेश ठाकुर ने कहा कि बिलासपुर एसडीएम से दो साल में हुए सेकंड हैंड गाड़ियों के पंजीकरण का रिकार्ड मांगा गया है।
 
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