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नई व्यवस्था: हिमाचल में बिना निरीक्षण नहीं होगा निजी प्ले और प्री नर्सरी स्कूलों का पंजीकरण

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 19 Jun 2026 05:00 AM IST
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सार

 अब निजी क्षेत्रों में प्ले और प्री नर्सरी स्तर के प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा केंद्र (ईसीसीई) बिना निरीक्षण के संचालित नहीं हो सकेंगे। 

Registration of private play and pre nursery schools in Himachal will not take place without inspection.
प्री नर्सरी (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश में अब निजी क्षेत्रों में प्ले और प्री नर्सरी स्तर के प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा केंद्र (ईसीसीई) बिना निरीक्षण के संचालित नहीं हो सकेंगे। राज्य सरकार ने ऐसे केंद्रों के पंजीकरण, नवीनीकरण और नियमित निगरानी के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत किसी भी ईसीसीई केंद्र को पंजीकरण से पहले निर्धारित मानकों पर खरा उतरना होगा। महिला एवं बाल विकास विभाग ने हिमाचल प्रदेश अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन सेंटर्स (पंजीकरण एवं विनियमन) नियम-2026 के तहत जिला और उपमंडल स्तर पर निरीक्षण समितियों का गठन किया है। इन समितियों की अध्यक्षता संबंधित एसडीएम करेंगे। समिति में खंड विकास अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, खंड चिकित्सा अधिकारी, पंचायत अथवा शहरी निकाय के प्रतिनिधि, आईसीडीएस पर्यवेक्षक और बाल विकास परियोजना अधिकारी शामिल होंगे। सरकार का उद्देश्य तीन से छह वर्ष तक की आयु के बच्चों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मानक आधारित प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध करवाना है।

दो साल में कम से कम एक बार होगी जांच

नई व्यवस्था के तहत निजी क्षेत्र में संचालित प्ले और प्री-प्राइमरी स्कूलों की जवाबदेही भी तय होगी। नए नियमों के अनुसार पंजीकरण के लिए आवेदन प्राप्त होने के बाद निरीक्षण समिति संबंधित केंद्र का दौरा करेगी। इस दौरान भवन, कक्षाओं, खेल क्षेत्र, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा व्यवस्था, बच्चों के अनुकूल वातावरण और अन्य बुनियादी सुविधाओं की जांच की जाएगी। सरकार ने केवल पंजीकरण तक ही निगरानी सीमित नहीं रखी है। नियमों के अनुसार पंजीकृत ईसीसीई केंद्रों का कम से कम दो वर्ष में एक बार निरीक्षण अनिवार्य होगा। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि केंद्र लगातार निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं या नहीं। निरीक्षण के दौरान बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, आधारभूत ढांचा, शिक्षण गतिविधियां और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी। निरीक्षण रिपोर्ट महिला एवं बाल विकास विभाग को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

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