आरएलए फर्जीवाड़ा : क्राइम ब्रांच ने दिल्ली से धरा एजेंट, प्रदेश के चार पुलिस के रडार पर
अंतरराज्यीय फर्जी वाहन पंजीकरण और चोरी की लग्जरी गाड़ियों के नेटवर्क मामले में दिल्ली क्राइम ब्रांच ने दिल्ली से एक और एजेंट को गिरफ्तार किया गया है।
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आरएलए बिलासपुर से जुड़े अंतरराज्यीय फर्जी वाहन पंजीकरण और चोरी की लग्जरी गाड़ियों के नेटवर्क मामले में दिल्ली क्राइम ब्रांच ने दिल्ली से एक और एजेंट को गिरफ्तार किया गया है। हिमाचल प्रदेश में चार एजेंट क्राइम ब्रांच के रडार आ गए हैं। आने वाले दिनों में मामले में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एजेंसी ने जांच तेज कर दी है। तीन से चार दिन तक बिलासपुर में गहन पड़ताल के बाद टीम दिल्ली लौट गई है, लेकिन जांच एजेंसी अपने साथ कई अहम सुराग ले गई है। सूत्रों के अनुसार, क्राइम ब्रांच की टीम ने बिलासपुर से तीन ऐसी गाड़ियों को भी कब्जे में लिया है जिन्हें एसडीएम कार्यालय की ओर से पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। इन वाहनों के दस्तावेज संबंधित मालिकों के पास नहीं मिले। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों और जाली पंजीकरण प्रक्रिया के जरिये वैध बनाया गया था। अब तक दिल्ली क्राइम ब्रांच देशभर स 34 गाड़ियां कब्जे में ले चुकी है। इनमें कई लग्जरी वाहन शामिल हैं। आरएलए कार्यालय में इस्तेमाल हुए कंप्यूटर सिस्टम, एक्सेस लॉग और डिजिटल एंट्री की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
यह है मामला
जनवरी में दिल्ली क्राइम ब्रांच की जांच के दौरान यह पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया था। जांच में खुलासा हुआ था कि चोरी की लग्जरी गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों और डिजिटल एंट्री के जरिये आरएलए बिलासपुर से वैध तरीके से पंजीकृत दिखाया गया। मामला सामने आने के बाद क्राइम ब्रांच ने आरएलए बिलासपुर के वरिष्ठ सहायक सुभाष को गिरफ्तार किया था। उससे पूछताछ के आधार पर गौरव को मामले में आरोपी बनाया गया। अब तक की जांच में फर्जीवाड़े का मुख्य मास्टरमाइंड गौरव को ही माना जा रहा है। क्राइम ब्रांच की पूछताछ में उसने स्वीकार किया है कि पूरा नेटवर्क वही संचालित कर रहा था। उसने यह मोबाइल और सिस्टम से तत्कालीन एसडीएम और वरिष्ठ आरएलए सहायक सुभाष की आईडी का इस्तेमाल करता था।
जांच अब भी एजेंटों तक सीमित रहने पर चर्चा
मामले में अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि इतने बड़े फर्जीवाड़े के बावजूद जांच अभी तक एजेंटों और निचले स्तर तक ही सीमित दिखाई दे रही है। प्रदेश स्तर पर गठित जांच समितियां भी अब तक अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश नहीं कर पाई हैं। गौरव के अधिकारियों की आईडी इस्तेमाल करने की बात स्वीकार करने के बाद जांच के दायरे को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। हालांकि फिलहाल दिल्ली क्राइम ब्रांच का पूरा फोकस नेटवर्क से जुड़े एजेंटों, बिचौलियों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों तक पहुंचने पर बना हुआ है।