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Sawan 2026: शिव आराधना का पावन पर्व शुरू, जानिए कब पड़ेंगे सावन के चार सोमवार
Mon, 06 Jul 2026 12:47 PM IST
Ankesh Dogra
भारती शर्मा, शिमला।
भारती शर्मा, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 06 Jul 2026 12:47 PM IST
सार
इस वर्ष श्रावण (सावन) मास 16 जुलाई से 16 अगस्त तक रहेगा। सावन में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और सोमवार व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। कर्क संक्रांति के अनुसार व्रत रखने वालों के लिए चार सोमवार 20 जुलाई, 27 जुलाई, 3 अगस्त और 10 अगस्त को पड़ेंगे। श्रद्धालु पूरे महीने शिव आराधना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। पढ़ें विस्तार से...
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इस वर्ष श्रावण मास में चार सोमवार पड़ेंगे।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
भगवान शिव की भक्ति और आराधना का सबसे पवित्र माना जाने वाला श्रावण (सावन) मास इस वर्ष 16 जुलाई से प्रारंभ होकर 16 अगस्त तक रहेगा। जैसे ही यह मास शुरू होगा, प्रदेश भर के शिव मंदिरों में धार्मिक गतिविधियां तेज हो जाएंगी। इस पावन महीने में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, दुग्धाभिषेक, बेलपत्र अर्पित करने के साथ-साथ सोमवार व्रत रखकर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा।
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सावन के सोमवारों की तिथियां
राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने जानकारी देते हुए बताया कि कर्क संक्रांति के अनुसार व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार सावन मास में चार सोमवार पड़ेंगे। ये तिथियां क्रमशः 20 जुलाई, 27 जुलाई, 3 अगस्त और 10 अगस्त होंगी। वहीं, जो श्रद्धालु श्रावण कृष्ण पक्ष से सोमवार व्रत शुरू करते हैं, उनके लिए सोमवार 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त को रहेंगे। श्रद्धालु अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार इन तिथियों पर व्रत और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
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सावन मास का आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। यह माना जाता है कि इस पूरे महीने श्रद्धा और विधि-विधान से शिव की उपासना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विशेष रूप से, सावन के सोमवार का व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव की पूजा करते हैं। इसके साथ ही 'ॐ नमः शिवाय' और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी विशेष फलदायी होता है।
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श्रद्धालुओं की भीड़ और व्यवस्थाएं
सावन के दौरान प्रदेश के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। शिमला सहित विभिन्न जिलों के मंदिरों में सुबह से ही भक्त भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचना शुरू कर देंगे। मंदिर समितियां भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं करने में जुट गई हैं। कई स्थानों पर धार्मिक प्रवचन, भजन संध्या और सामूहिक रुद्राभिषेक जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा, ताकि भक्तजन भक्ति भाव में लीन हो सकें।
संयम और साधना का संदेश
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि सावन केवल पूजा-पाठ का महीना नहीं है, बल्कि यह संयम, सेवा, सात्विक जीवनशैली और आध्यात्मिक साधना का भी संदेश देता है। यही कारण है कि देशभर की तरह हिमाचल प्रदेश में भी सावन का महीना श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना करते हैं।
सावन के दौरान प्रदेश के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। शिमला सहित विभिन्न जिलों के मंदिरों में सुबह से ही भक्त भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचना शुरू कर देंगे। मंदिर समितियां भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं करने में जुट गई हैं। कई स्थानों पर धार्मिक प्रवचन, भजन संध्या और सामूहिक रुद्राभिषेक जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा, ताकि भक्तजन भक्ति भाव में लीन हो सकें।
संयम और साधना का संदेश
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि सावन केवल पूजा-पाठ का महीना नहीं है, बल्कि यह संयम, सेवा, सात्विक जीवनशैली और आध्यात्मिक साधना का भी संदेश देता है। यही कारण है कि देशभर की तरह हिमाचल प्रदेश में भी सावन का महीना श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना करते हैं।