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Shimla News: बारिश के बीच एसएफआई ने किया प्रदर्शन, वीसी मुर्दाबाद के लगाए नारे
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फीस वृद्धि वापस लेने और फर्जी प्रोफेसर भर्ती की जांच की उठाई मांग
कुलपति पर लगाया छात्रों से छुपने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में फीस वृद्धि और कथित फर्जी प्रोफेसर भर्ती के मुद्दे को लेकर एसएफआई ने वीरवार को मूसलाधार बारिश के बीच धरना-प्रदर्शन किया। बारिश के बावजूद छात्र प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे। इस दौरान फीस वृद्धि वापस लेने और कुलपति के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए गए।
प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फीस वृद्धि वापस लेने और भर्ती प्रक्रिया की जांच कराने की मांग उठाई। प्रदर्शन दोपहर 2 बजे से शुरू होकर 3 बजे तक चला। एसएफआई इकाई सचिव मुकेश ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सामान्य फीस, परीक्षा शुल्क, हॉस्टल शुल्क और अन्य प्रशासनिक मदों में 25 प्रतिशत तक वृद्धि की है। उन्होंने इसे छात्र विरोधी निर्णय बताते हुए वापस लेने की मांग की। छात्रों ने आरोप लगाया कि फीस वृद्धि का सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों पर पड़ेगा। संगठन का कहना है कि विवि का उद्देश्य विद्यार्थियों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है ऐसे में बढ़ी हुई फीस छात्रों की परेशानियां बढ़ाएगी।
प्रदर्शन के दौरान एसएफआई ने पुनर्मूल्यांकन शुल्क, थीसिस जमा करने की फीस, डिग्री शुल्क, माइग्रेशन प्रमाणपत्र और अन्य मदों में हुई बढ़ोतरी का भी विरोध किया। संगठन ने कहा कि इन शुल्कों में की गई वृद्धि को भी वापस लिया जाना चाहिए। एसएफआई ने विश्वविद्यालय में हुई कथित फर्जी प्रोफेसर भर्ती की जांच की मांग भी उठाई। संगठन ने प्रशासन से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन से पहले भी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की समस्याओं पर उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है। एसएफआई ने चेतावनी दी कि यदि फीस वृद्धि वापस नहीं ली गई और मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन को और तेज करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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कुलपति पर लगाया छात्रों से छुपने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में फीस वृद्धि और कथित फर्जी प्रोफेसर भर्ती के मुद्दे को लेकर एसएफआई ने वीरवार को मूसलाधार बारिश के बीच धरना-प्रदर्शन किया। बारिश के बावजूद छात्र प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे। इस दौरान फीस वृद्धि वापस लेने और कुलपति के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए गए।
प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फीस वृद्धि वापस लेने और भर्ती प्रक्रिया की जांच कराने की मांग उठाई। प्रदर्शन दोपहर 2 बजे से शुरू होकर 3 बजे तक चला। एसएफआई इकाई सचिव मुकेश ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सामान्य फीस, परीक्षा शुल्क, हॉस्टल शुल्क और अन्य प्रशासनिक मदों में 25 प्रतिशत तक वृद्धि की है। उन्होंने इसे छात्र विरोधी निर्णय बताते हुए वापस लेने की मांग की। छात्रों ने आरोप लगाया कि फीस वृद्धि का सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों पर पड़ेगा। संगठन का कहना है कि विवि का उद्देश्य विद्यार्थियों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है ऐसे में बढ़ी हुई फीस छात्रों की परेशानियां बढ़ाएगी।
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प्रदर्शन के दौरान एसएफआई ने पुनर्मूल्यांकन शुल्क, थीसिस जमा करने की फीस, डिग्री शुल्क, माइग्रेशन प्रमाणपत्र और अन्य मदों में हुई बढ़ोतरी का भी विरोध किया। संगठन ने कहा कि इन शुल्कों में की गई वृद्धि को भी वापस लिया जाना चाहिए। एसएफआई ने विश्वविद्यालय में हुई कथित फर्जी प्रोफेसर भर्ती की जांच की मांग भी उठाई। संगठन ने प्रशासन से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन से पहले भी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की समस्याओं पर उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है। एसएफआई ने चेतावनी दी कि यदि फीस वृद्धि वापस नहीं ली गई और मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन को और तेज करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।