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Shimla News : अफसरों ने खलीनी में वन विभाग के भवन में खुलवा दीं राशन और सब्जी की दुकानें, नियमों पर उठे सवाल

Thu, 23 Jul 2026 11:45 AM IST
Ankesh Dogra सुरेश शांडिल्य, शिमला।
सुरेश शांडिल्य, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 23 Jul 2026 11:45 AM IST
सार

शिमला के खलीनी स्थित वन विभाग के सरकारी भवन में कैंटीन की अनुमति के बावजूद राशन, सब्जी और जनरल स्टोर संचालित होने का मामला सामने आया है। विभागीय रिकॉर्ड में पहले ही ऐसी व्यावसायिक गतिविधियों पर आपत्ति दर्ज थी। सरकारी भवन के उपयोग और आवश्यक मंजूरियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलग-अलग बयान सामने आए हैं।

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shimla forest department government building ration shop commercial activity row
खलीनी में वन विभाग के कार्यालय में खोल दी सब्जी और अन्य सामान की दुकानें। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

खलीनी स्थित वन विभाग के एक भवन में अब सिर्फ सरकारी दफ्तर ही नहीं, बल्कि राशन, सब्जी और रोजमर्रा के सामान की दुकानें भी चल रही हैं। कर्मचारियों की सुविधा के लिए कैंटीन खोलने की मंजूरी लेने की आड़ में हिमाचल प्रदेश वन विभाग के भवन में यह दुकानें संचालित की जा रही हैं।

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प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन एवं वित्त) कार्यालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि सरकारी भवन में जनरल स्टोर या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद इस भवन में जनरल स्टोर और अन्य दुकान संचालित की जा रही है। इन्हें किराये पर चढ़ाया गया है। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 9 जनवरी 2026 को पीसीसीएफ (वन व वित्त) कार्यालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया था कि कर्मचारियों की सुविधा के लिए विभागीय परिसर में निर्धारित नियमों के तहत केवल कैंटीन संचालित की जा सकती है। 
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पत्र में कहा गया कि कैंटीन का उद्देश्य कर्मचारियों को चाय-नाश्ता और सीमित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है, जबकि जनरल स्टोर या राशन की दुकान पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधि की श्रेणी में आती है। 
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पत्र में नगर निगम अधिनियम और अन्य लागू सरकारी नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया था कि सरकारी भवन का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जा सकता है, जिसके लिए उसका निर्माण या आवंटन हुआ है। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि इन निर्देशों की अनदेखी कर जनरल स्टोर या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की जाती हैं अथवा भविष्य में किसी प्रकार का कानूनी विवाद उत्पन्न होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।

वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार नियमों के अनुसार सरकारी विभाग के भवन के उपयोग में किसी भी प्रकार के बदलाव के लिए सक्षम प्राधिकारी के साथ वित्त विभाग की मंजूरी भी अनिवार्य है। किसी भी अधिकारी को अपने स्तर पर सरकारी भवन को व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराने का अधिकार नहीं है। 

सवाल उठ रहे हैं कि जब विभागीय रिकॉर्ड में ऐसी गतिविधियों पर स्पष्ट आपत्ति दर्ज थी, तो आखिर किस आधार पर सरकारी भवन का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए दिया गया। पीसीसीएफ (हॉफ) डॉ. संजय सूद ने कहा कि यह प्रशासनिक मामला है। इसके अलावा उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया।

कर्मचारियों की सुविधा देने के लिए बाकायदा टेंडर लगाए
दुकानों के संचालन के लिए बाकायदा टेंडर लगाए गए हैं। जहां तक उन्हें जानकारी है, इसके लिए सभी आवश्यक अनुमतियां ले ली गई हैं। अधीनस्थ अधिकारियों ने उन्हें यही जानकारी दी है। हर मामले में वित्त विभाग की मंजूरी जरूरी नहीं होती। कर्मचारियों की सुविधा के लिए यह सब किया गया है।  -के. तिरुमल, मुख्य अरण्यपाल (वन) 
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