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Shimla: चौड़ा मैदान में हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति का धरना प्रदर्शन, सरकार पर लगाए ये आरोप

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 17 Feb 2026 01:08 PM IST
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सार

मंगलवार को पेंशनरों ने लंबित पड़ी मांगों को लेकर चौड़ा मैदान में धरना प्रदर्शन किया। संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश की सरकार पर पेंशनरों की मांगों को पूरा न करने के और मुख्यमंत्री के ऊपर वादाखिलाफी के गंभीर आरोप लगाए हैं। पढे़ं पूरी खबर...

Shimla Himachal Pradesh Pensioners Joint Struggle Committee staged a sit-in at Chaura Maidan
चौड़ा मैदान में धरना प्रदर्शन करते पेंशनर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा पेंशनरों की लंबित पड़ी मांगों को मनवाने के लिए आज एक दिन का जोरदार धरना प्रदर्शन सुरेश ठाकुर चेयरमैन की अगुवाई में चौड़ा मैदान शिमला में हिमाचल प्रदेश सरकार के खिलाफ किया गया।
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संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश की सरकार पर पेंशनरों की मांगों को पूरा न करने के और मुख्यमंत्री के ऊपर वादाखिलाफी के गंभीर आरोप लगाए हैं और सरकार की कड़े शब्दों में निंदा की है। प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने बताया कि 28/11/25 को प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर एक बड़ा धरना प्रदर्शन और रैली प्रदेश सरकार के खिलाफ धर्मशाला जोरावार स्टेडियम में निकाली गई थी और मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में शिष्टमंडल को बुलाकर आश्वासन दिया गया कि वह उन्हें बातचीत के लिए विधानसभा समाप्त होने के एक सप्ताह के अन्दर बुलाएंगे पर सब कुछ झूठ, मुख्यमंत्री की कथनी और करनी में फर्क है।
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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की न तो सकारात्मक सोच है और न ही सही दिशा जिसने प्रदेश को भारी वित्तीय संकट में पहुंचा दिया है। प्रदेश पर इस समय एक लाख दस हजार करोड़ से भी ज्यादा ऋण हो चुका है, जबकि केंद्र सरकार ने प्रदेश के लिए राजस्व अनुदान घाटा बंद कर दिया है। हाल ही में प्रमुख वित्त सचिव हिमाचल सरकार नें प्रदेश की वित्तीय स्थिति प्रस्तुत की है उसमें बताया गया है कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का महंगाई भता फ्रीज किया जाएगा, पेंशनरों की बकाया राशि भी नहीं दिया जा सकता है, सहारा योजना, हिम केयर योजनाएं बंद करनी पड़ेंगी और भी बहुत सारी कटौतियों का हवाला दिया है। लेकिन माननीयों के वेतन भत्तों और पेंशन की कटौती और फिजूलखर्ची पर कोई भी सुझाव नहीं दिए हैं। जिससे लगता है कि सरकार पेंशनर्स और कर्मचारी विरोधी है और साथ में जन विरोधी भी है।

समिति ने स्पष्ट किया है कि राजस्व अनुदान घाटे के बंद होने का पेंशनरों की पैंशन और कर्मचारियों की सैलरी और बकाया राशि से कोई लेना देना नहीं है। समिति नें सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के चेयरमैन व मेंबर्स की पेंशन को प्रति माह 6 गुना तक बढ़ाने बारे, अथार्थ 8000/- रुपये और 7500/- रुपये क्रमशः से 48000/- रुपये और 45000/- रुपये क्रमशः महीने के बढ़ाने तथा 6% सालाना बेसिक पेंशन की बढ़ोतरी करने बारे, सरकारी विभागों, निगमों और बोर्डो में बहुत सारे चेयरमैन, वाईस चेयरमैन और मेंबर्स की नियुक्तियां करके और फिर उनमें से बहुत सारों को कैबिनेट रैंक से नवाजना, विधायकों, मंत्रियों, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री की वेतन भत्तों में महीने में 40% की वृद्धि की अधिसूचना जारी करना, सलाहकारों,मुख्य सलाहकारों की फौज खड़ी करके अपनी मित्र मंडली को खुश करने के लिए काम किए हैं।

प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने सरकार की कार्याप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रदेश में सरकार नें अपनी मित्र मंडली को खुश करने के लिए और वित्तीय कुप्रबंधन की वजह से सरकारी खजाने पर भारी बोझ डाल कर प्रदेश को वित्तीय संकट में डाल रखा है जबकि पेंशनरों और कर्मचारियों की करोड़ों करोड़ों रुपये की देनदारियों से पल्ला झाड़कर उन्हें देने बारे आनाकानी कर रही है।

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