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पोर्टरहिल जिप लाइन हादसा: जांच की जद में पुलिस, पर्यटन और वन विभाग के अधिकारी; जानें पूरा मामला विस्तार से

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 04 Feb 2026 11:20 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पोर्टरहिल में वर्ष 2014 में हुए जिप लाइन हादसे के मामले में जिपलाइन संचालक को भी आरोपी बनाया गया। अब अदालत के निर्देशों के बाद प्रदेश सरकार ने इस मामले में बालूगंज थाने में तत्कालीन जांच अधिकारियों और मामले से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्जकर करवाया है।

Shimla Porterhill zipline accident Police tourism, and forest department officials under investigation
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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राजधानी शिमला में समरहिल के पोर्टरहिल में वर्ष 2014 में हुए जिप लाइन हादसे के मामले में लापरवाही बरतने के आरोपों को लेकर चल रही जांच में पुलिस, पर्यटन निगम और वन विभाग के तत्कालीन अधिकारी जांच की जद में आ गए हैं। इन विभागों के अधिकारियों को पुलिस ने नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है।

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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की रहने वाली मोनी बंसल वर्ष 2014 में शिमला घूमने के लिए परिवार के साथ शिमला आईं थीं। इस दौरान पोर्टरहिल में जिप लाइन क्रॉस करते हुए वह हादसे का शिकार हो गईं थीं। हादसे ने महिला की जिंदगी को बुरी तरह से बर्बाद कर दिया और चलने-फिरने में असमर्थ हो गईं। इस मामले को लेकर महिला की मां सीमा अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस दौरान सामने आया कि पुलिस के तत्कालीन जांच अधिकारियों ने मामले की जांच में लापरवाही बरती है। इसमें साहसिक गतिविधियां संचालित करने वाले संचालक और संबंधित विभागों पर भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई थी।
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हैरानी इस बात की है कि इस मामले में काम करने वाले दो कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्देश के बाद मामला प्रदेश सरकार के ध्यान में आया और इसके बाद दोबारा जांच की गई और इसमें जिपलाइन संचालक को भी आरोपी बनाया गया। अब अदालत के निर्देशों के बाद प्रदेश सरकार ने इस मामले में बालूगंज थाने में तत्कालीन जांच अधिकारियों और मामले से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्जकर करवाया है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीएसपी रैंक के अधिकारी को जांच का जिम्मा सौंपा है। पुलिस के तत्कालीन जांच अधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब किया जा चुका है जबकि विभिन्न विभागों से जुड़े तत्कालीन अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। इसको लेकर सभी को नोटिस जारी कर दिए हैं। इस गंभीर मामले में लापरवाही बरतने वाले जांच अधिकारियों समेत विभिन्न विभागों के जिम्मेदार तत्कालीन अधिकारियों की भी आने वाले दिनों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं इस मामले में पुलिस की जांच को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कई जगह उड़ रहीं सुरक्षा मानकों की धज्जियां
प्रदेश में ऐसे रोमांच और साहसिक खेलों के नाम पर कई जिप लाइनों का संचालन किया जा रहा है, जहां पर सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा ही हैं। इसी तरह के हादसों में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। डीआईजी संजीव कुमार गांधी ने बताया कि पुलिस की टीम मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है। मामले से संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए तलब किया जा रहा है।
 
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