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Shimla News: नगर निगम के बिजली-पानी काटने के आदेश पर रोक

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jun 2026 11:59 PM IST
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Stay on Municipal Corporation's order to disconnect electricity and water supply.
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत का फैसला

2024 को पारित किया आदेश, 4 जून 2026 को भेजा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अदालत ने नगर निगम के उस आदेश के क्रियान्वयन और संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी है जिसमें एक परिसर का व्यावसायिक उपयोग करने का आरोप लगाते हुए उसके बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के निर्देश दिए थे। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-1 शिमला प्रवीण गर्ग की अदालत ने मामले की सुनवाई तक इस आदेश पर स्टे लगा दिया है।

अदालत ने आदेश में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं जीवन के अधिकार का एक अनिवार्य हिस्सा है। किसी भी प्रभावित पक्ष को सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना और कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना उन्हें इन सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि नगर निगम ने यह विवादित आदेश 5 अक्तूबर 2024 को पारित किया था लेकिन इसे अपीलकर्ता को करीब डेढ़ साल की लंबी देरी के बाद 4 जून 2026 को भेजा गया। अदालत ने कहा कि नगर निगम का यह आदेश एकतरफा पारित किया था। कानून के मुताबिक एकतरफा कार्रवाई सही थी या नहीं इसका फैसला नगर निगम के रिकॉर्ड की जांच के बाद किया जा सकेगा।
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प्रोमिला शर्मा ने अदालत में नगर निगम शिमला के आयुक्त के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। नगर निगम ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि महिला आवासीय परिसर में दुकान चला रही है और उसने इसका व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इसके बाद निगम ने बिजली बोर्ड और एसजेपीएनएल को परिसर के बिजली-पानी के कनेक्शन काटने के निर्देश जारी किए थे।
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अपीलकर्ता महिला ने दलील दी कि उन्होंने भवन का उपयोग आवासीय से व्यावसायिक में नहीं बदला है। इस परिसर को वर्ष 2009 में खरीदने के बाद से ही गोदाम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह क्षेत्र उस समय नगर निगम शिमला की सीमा में शामिल भी नहीं था इसलिए नगर निगम को इस पर ऐसा आदेश पारित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत ने अपील को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को तय की है। पीड़ित पक्ष को तब तक के लिए राहत देते हुए निगम के आदेश पर रोक लगा दी है।
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