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Himachal: अतिक्रमण पर नीति बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का सरकार को कारण बताओ नोटिस, जानें पूरा मामला

भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 17 Feb 2026 05:00 AM IST
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सार

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जायमाल्य बागची की खंडपीठ ने राज्य सरकार को इस मामले कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

Supreme Court issues show cause notice to govt on formulating policy on encroachment
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण मामलों में हाईकोर्ट के आदेशों पर विभाग की ओर से शिमला के बागी और रतनाडी क्षेत्रों में की जा रही कार्रवाई और अंतरिम आदेशों पर रोक लगा दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जायमाल्य बागची की खंडपीठ ने राज्य सरकार को इस मामले कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट के समक्ष चल रही अतिक्रमण मामलों में आगे की कार्रवाई पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने अतिक्रमण मामलों में पॉलिसी बनाने के आदेशों पर क्या कार्रवाई की है। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि 16 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से अतिक्रमण मामलों में पॉलिसी बनाने और उससे जुड़े मामलों में पारित अदालती आदेश के अनुपालन में अब तक क्या कार्रवाई की गई है। अगली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को शीर्ष अदालत में अपनी अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर को सरकार को दिए थे ये आदेश
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को प्रदेश सरकार को अतिक्रमण मामलों में पॉलिसी बनाने के आदेश दिए हैं, लेकिन प्रदेश हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका जो कि जिला शिमला के बागी और रतनाड़ी से जुड़ी है। उसमें अपने आदेशों की अनुपालन करने को कहा है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जिला उपायुक्त शिमला और डीएफओ ठियोग को सभी अतिक्रमणकारियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट में प्रत्येक अतिक्रमणकारी की पूरी जानकारी मांगी गई है। अतिक्रमणकारी व्यक्ति का नाम, संबंधित गांव का विवरण, व्यक्ति के नाम पर अपनी कितनी निजी भूमि है, वन भूमि के कितने कुल क्षेत्र पर अवैध कब्जा किया गया है, पूरा विवरण देना होगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह सारी जानकारी 15 फरवरी 2026 या उससे पहले अदालत में पेश करनी होगी। इस मामले को 24 फरवरी को सुनवाई के लिए हाईकोर्ट में सूचीबद्ध किया गया है।


 
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आदेश को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर चुनौती दी
बागी गांवों के निवासी विकेश रोहटा और अन्य कुछ लोगों ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की पैरवी अधिवक्ता नरेश तोमर ने की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद हिमाचल हाईकोर्ट अवैध कब्जा को हटाने और बेदखली के आदेश दे रहा है, जोकि सरासर न्याय संगत नहीं है। किसान नेता राकेश सिंघा ने कहा कि 2 महीने बीत गए हैं लेकिन अभी तक राज्य सरकार ने पॉलिसी बनाने की नीति पर कोई गंभीर कदम नहीं उठाया है।


 
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