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Shimla News: शहर के वीआईपी छोटा शिमला थाने के पास अपना वाहन नहीं

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Apr 2026 11:59 PM IST
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The city's VIP Chota Shimla police station does not have its own vehicle.
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छोटा शिमला थाने की परिधि में आते हैं सचिवालय, राजभवन समेत कई सरकारी दफ्तर और मंत्रियों के आवास, पुलिस कर्मी टैक्सियां में जाते हैं मौके पर
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रात्रि गश्त समेत अन्य कार्य हो रहे हैं प्रभावित
घटनास्थल तक पहुंचने में आ रहीं दिक्कतें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिला शिमला की स्मार्ट पुलिस बिना मूलभूत सुविधाओं के अपना कामकाज करने को मजबूर है। हालत यह है कि प्रदेश के सबसे वीआईपी थाने में शामिल आदर्श थाना छोटा शिमला के पास सरकारी वाहन तक नहीं है। यह थाना सचिवालय के एकदम साथ में है। वाहन न होने से पुलिस के रात्रि गश्त समेत अन्य महत्वपूर्ण कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।
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वहीं किसी भी आपराधिक वारदात के होने पर घटनास्थल तक पहुंचने में भी पुलिस कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में पुलिस कर्मी निजी वाहनों और टैक्सियों से कामकाज को निपटा रहे हैं लेकिन बिलों के पास होने में हो रही देरी के कारण इसमें भी दिक्कतें आ रही हैं। आदर्श थाना छोटा शिमला की परिधि में प्रदेश सचिवालय समेत, राजभवन, मंत्रियों के आवास और ज्यादातर सरकारी कार्यालय भी आते हैं। आए दिन सरकारी नीतियों के खिलाफ और मांगों को लेकर राजनीतिक संगठन और विभिन्न संघ धरना प्रदर्शन करने के लिए यहां पर ही पहुंचते हैं। इसके बावजूद इस थाने को सरकारी वाहन तक उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है। सबसे अधिक परेशानी उस समय पेश आती है जब थाना क्षेत्र में हत्या, चोरी और अन्य आपराधिक घटनाएं सामने आती हैं। इसमें कई बार लोग देररात भी पुलिस को सूचित करके घटनास्थल पर आने का आग्रह करते हैं लेकिन पुलिस कर्मी ऐसे में बेबस नजर आते हैं।
कई बार वाहन की वैकल्पिक व्यवस्था करने में भी समय लग जाता है। ऐसे में घटनास्थल पर पहुंचने में पुलिस को देर हो जाती है। इससे कई बार पुलिस को लोगों के रोष का सामना भी करना पड़ता है। जिले में कई थानों में वाहनों की कमी के कारण इस तरह की समस्या चल रही थी। इसमें से कई थानों को वाहन उपलब्ध भी करवा दिए हैं लेकिन शहर के सबसे वीआईपी और महत्वपूर्ण पुलिस स्टेशन को अभी जरूरत पड़ने पर ही वाहन उपलब्ध करवाया जाता है। कुछ समय पहले थाने को वाहन उपलब्ध करवाया गया था लेकिन अब इसे दोबारा वापस ले लिया है। ऐसे में पुलिस को अपने क्षेत्राधिकार में कानून व्यवस्था को बनाए रखने में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चिंता की बात यह है कि राजधानी शिमला के पुलिस थाने में सुविधाओं की यह हालत है तो ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में स्थिति क्या होगी इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। जिले में 22 थाने हैं। वहीं, 34 पुलिस चौकियां हैं।



पुलिस चौकियों में वाहन का प्रावधान नहीं
पुलिस थाने में सरकारी वाहन नहीं होने से इसके अधीन आने वाली पुलिस चौकियों का कामकाज प्रभावित होता है क्योंकि पुलिस चौकियों में वाहन का प्रावधान नहीं किया गया है। जिले में पुलिस चौकियों के पास भी दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्र आते हैं। वाहन की उपलब्धता नहीं होने के कारण पुलिस को अपने क्षेत्र में हादसे, आपराधिक घटना होने पर मौके पर पहुंचने में खासी परेशानी से जूझना पड़ता है। एसएसपी गौरव सिंह ने बताया कि छोटा शिमला थाने को जरूरत पड़ने पर वाहन उपलब्ध करवाया जाता है। सभी थानों को वाहन मिल सके, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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