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Health Alert: ऑटोइम्यून गड़बड़ी से बच्चों में टाइप-1 मधुमेह का खतरा, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

Fri, 31 Jul 2026 10:26 AM IST
Ankesh Dogra आदित्य सोफत, शिमला।
आदित्य सोफत, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Fri, 31 Jul 2026 10:26 AM IST
सार

डीडीयू अस्पताल शिमला के बाल रोग विभाग की रिपोर्ट में छह माह से 18 वर्ष तक के बच्चों में टाइप-1 मधुमेह के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार ऑटोइम्यून असंतुलन के कारण यह बीमारी विकसित हो सकती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर डायबिटिक कीटोएसिडोसिस जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है। नियमित इंसुलिन, चिकित्सकीय परामर्श और परिवार की जागरूकता से बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है।

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type 1 diabetes children autoimmune ddu hospital shimla report
टाइप 1 डायबिटीज के मामलों में वृद्धि - फोटो : Amarujala.com

विस्तार

ऑटोइम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी) के असंतुलन से छह माह से 18 वर्ष तक की आयु तक टाइप-वन मधुमेह का खतरा बढ़ रहा है। हालांकि, यह लक्षण सभी बच्चों में दिखाई नहीं देते, लेकिन ऑटोइम्यून असंतुलन की वजह से कुछ बच्चों में टाइप-वन मधुमेह के लक्षण उभर आते हैं। यदि समय पर उपचार न कराया जाए, तो इससे डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (रक्त शुगर) का खतरा पैदा हो जाता है। इस स्थिति में बच्चे तेज व गहरी सांस लेने, उल्टी, पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी और बेहोशी जैसे विकारों की चपेट में आ जाते हैं। प्रदेश के अस्पतालों में छह माह से 18 वर्ष के बच्चों में टाइप-वन मधुमेह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऑटोइम्यून सिस्टम के असंतुलन से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती है।  शरीर में इंसुलिन का बनना बंद हो जाता है। 

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दीन दयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल शिमला के पीडियाट्रिक विभाग ने अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले पीड़ित बच्चों की जुलाई 2026 में रिपोर्ट तैयार की है। मामलों के अध्ययन से पता चला है कि बच्चों में टाइप-वन मधुमेह होने पर यदि समय पर उपचार न कराया जाए, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। विभाग वर्तमान में लगभग 20 बच्चों का नियमित फॉलो-अप कर रहा है। अध्ययन के अनुसार, नियमित परामर्श, इंसुलिन उपचार, परिवार की जागरूकता और लगातार फॉलो-अप से टाइप-वन मधुमेह को डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (रक्त शुगर) जैसी गंभीर स्थिति में बदलने से रोका जा सकता है।
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टाइप-1 मधुमेह के लक्षण वजन का तेजी से कम होना, अत्यधिक कमजोरी और थकान, बार-बार भूख लगना, बार-बार पेशाब आना, बहुत अधिक प्यास लगना, संक्रमण होना

माता-पिता में होता है टाइप-2 का मधुमेह
आमतौर पर वयस्क या माता-पिता में टाइप-2 मधुमेह देखा जाता है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, इसलिए बीमारी का पता चलने के बाद से ही नियमित दवाइयां लेनी पड़ती हैं। कुछ मामलों में मरीज को इंसुलिन की आवश्यकता भी पड़ सकती है।

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टाइप-वन मधुमेह का मतलब जीवन का रुक जाना नहीं है। सही समय पर पहचान, नियमित इंसुलिन, उचित परामर्श और परिवार के सहयोग से हर बच्चा स्वस्थ, सुरक्षित और सफल जीवन जी सकता है। लक्षणों की समय पर पहचान कर अभिभावक अपने बच्चे का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं।  - डॉ. अंकुर धर्माणी, बाल रोग विशेषज्ञ डीडीयू अस्पताल, शिमला
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