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Shimla News: 110 करोड़ खर्च करने के बावजूद सात माह में तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के 17 सैंपल फेल
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अमृत योजना के तहत उन्नयन के बाद भी मल्याणा के 5, लालपानी के 5 और ढली के 7 सैंपल फेल
एनजीटी में पेश की गई प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में खुलासा
एक्सक्लूसिव
हर्षित शर्मा
शिमला। राजधानी में पेयजल कंपनी ने अमृत मिशन के तहत करीब 110 करोड़ रुपये खर्च कर मल्याणा, लालपानी और ढली सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों (एसटीपी) का उन्नयन किया था। इसका मकसद सीवेज प्रदूषण रोकने, अश्वनी खड्ड को स्वच्छ बनाने और पेयजल स्रोतों की सुरक्षा करना था लेकिन यह भी अब फेल होता नजर आ रहा है।
हालत यह है कि अब भी इन एसटीपी से छोड़े जा रहे पानी के सैंपल फेल हो रहे हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में प्रस्तुत हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2025 से फरवरी 2026 के बीच मल्याणा और लालपानी के पांच-पांच, जबकि ढली के सात नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।
कई मौकों पर शोधित पानी में फीकल कोलीफॉर्म, बीओडी, सीओडी, टीएसएस, टोटल नाइट्रोजन और टोटल फॉस्फोरस तय सीमा से अधिक पाए गए।
तीनों संयंत्रों में सबसे गंभीर स्थिति 35 करोड़ की लागत से अपग्रेड किए गए ढली एसटीपी की रही। 24 नवंबर 2025 को लिए गए नमूने में बीओडी, सीओडी, टीएसएस और फीकल कोलीफॉर्म चारों प्रमुख मानक फेल पाए गए। 18 दिसंबर को बीओडी, टीएसएस और फीकल कोलीफॉर्म फिर निर्धारित सीमा से ऊपर दर्ज किए गए। 17 जनवरी 2026 को फीकल कोलीफॉर्म और टोटल नाइट्रोजन फेल मिले, जबकि 18 फरवरी को टोटल नाइट्रोजन और टोटल फॉस्फोरस भी मानकों से अधिक पाए गए। 30 करोड़ की लागत से अपग्रेड किए गए लालपानी एसटीपी में 14 अगस्त, 22 सितंबर और 8 अक्तूबर 2025 को फीकल कोलीफॉर्म की समस्या सामने आई। 22 सितंबर के नमूने में बीओडी भी निर्धारित सीमा से अधिक दर्ज हुआ। 17 जनवरी 2026 को टोटल नाइट्रोजन और 9 फरवरी 2026 को टोटल नाइट्रोजन के साथ टोटल फॉस्फोरस भी फेल पाया गया। 45 करोड़ की लागत से अपग्रेड किए गए मल्याणा एसटीपी में भी लगभग यही स्थिति रही। अगस्त और अक्तूबर 2025 में फीकल कोलीफॉर्म निर्धारित सीमा से अधिक मिला। सितंबर में बीओडी और फीकल कोलीफॉर्म दोनों मानक फेल हुए। जनवरी और फरवरी 2026 में टोटल नाइट्रोजन और टोटल फॉस्फोरस स्वीकार्य सीमा से ऊपर दर्ज किए गए।
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कंपनी का दावा, हमारे सैंपल ठीक : एजीएम
पेयजल कंपनी के एजीएम आदर्श भौटा का कहना है कि अपग्रेड किए गए सभी एसटीपी के सैंपल ठीक हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने खड्डों में जाकर सैंपल भरे हैं। इनमें सिर्फ एसटीपी का ही पानी नहीं पहुंचता है बल्कि आसपास के अन्य नालों से भी पानी बहता है। इसके अलावा अवैध डंपिंग से भी कई बार पानी दूषित होता है। दावा किया कि कंपनी के सैंपल ठीक है।
इनसेट
प्रदेशभर के 10 अन्य एसटीपी में एक साल में 62 सैंपल फेल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट बताती है कि समस्या केवल शिमला तक सीमित नहीं है। बीते एक साल में मंडी जिले के जोगिंद्रनगर एसटीपी के नौ नमूने फेल पाए गए। मंडी जिले के खलियार एसटीपी में सात नमूने फेल हुए। जून, नवंबर और दिसंबर 2025 में फीकल कोलीफॉर्म की अधिकता दर्ज की गई। रघुनाथ का पाधर एसटीपी के सात नमूने अमानक पाए गए। सुंदरनगर नगर परिषद प्लांट के एसटीपी में छह नमूने फेल हुए। बीबीएमबी सुंदरनगर एसटीपी के नौ नमूने फेल पाए गए। शिमला जिले के रोहड़ू एसटीपी में सात नमूने अमानक पाए गए। जुब्बल एसटीपी में तीन नमूने फेल पाए गए। सोलन जिले के परवाणू एसटीपी में छह नमूने फेल हुए। नालागढ़ एसटीपी में तीन नमूने फेल पाए गए। सरकाघाट एसटीपी में छह नमूने नए पैमानों से ऊपर पाए गए।
एनजीटी में पेश की गई प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में खुलासा
एक्सक्लूसिव
हर्षित शर्मा
शिमला। राजधानी में पेयजल कंपनी ने अमृत मिशन के तहत करीब 110 करोड़ रुपये खर्च कर मल्याणा, लालपानी और ढली सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों (एसटीपी) का उन्नयन किया था। इसका मकसद सीवेज प्रदूषण रोकने, अश्वनी खड्ड को स्वच्छ बनाने और पेयजल स्रोतों की सुरक्षा करना था लेकिन यह भी अब फेल होता नजर आ रहा है।
हालत यह है कि अब भी इन एसटीपी से छोड़े जा रहे पानी के सैंपल फेल हो रहे हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में प्रस्तुत हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2025 से फरवरी 2026 के बीच मल्याणा और लालपानी के पांच-पांच, जबकि ढली के सात नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।
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कई मौकों पर शोधित पानी में फीकल कोलीफॉर्म, बीओडी, सीओडी, टीएसएस, टोटल नाइट्रोजन और टोटल फॉस्फोरस तय सीमा से अधिक पाए गए।
तीनों संयंत्रों में सबसे गंभीर स्थिति 35 करोड़ की लागत से अपग्रेड किए गए ढली एसटीपी की रही। 24 नवंबर 2025 को लिए गए नमूने में बीओडी, सीओडी, टीएसएस और फीकल कोलीफॉर्म चारों प्रमुख मानक फेल पाए गए। 18 दिसंबर को बीओडी, टीएसएस और फीकल कोलीफॉर्म फिर निर्धारित सीमा से ऊपर दर्ज किए गए। 17 जनवरी 2026 को फीकल कोलीफॉर्म और टोटल नाइट्रोजन फेल मिले, जबकि 18 फरवरी को टोटल नाइट्रोजन और टोटल फॉस्फोरस भी मानकों से अधिक पाए गए। 30 करोड़ की लागत से अपग्रेड किए गए लालपानी एसटीपी में 14 अगस्त, 22 सितंबर और 8 अक्तूबर 2025 को फीकल कोलीफॉर्म की समस्या सामने आई। 22 सितंबर के नमूने में बीओडी भी निर्धारित सीमा से अधिक दर्ज हुआ। 17 जनवरी 2026 को टोटल नाइट्रोजन और 9 फरवरी 2026 को टोटल नाइट्रोजन के साथ टोटल फॉस्फोरस भी फेल पाया गया। 45 करोड़ की लागत से अपग्रेड किए गए मल्याणा एसटीपी में भी लगभग यही स्थिति रही। अगस्त और अक्तूबर 2025 में फीकल कोलीफॉर्म निर्धारित सीमा से अधिक मिला। सितंबर में बीओडी और फीकल कोलीफॉर्म दोनों मानक फेल हुए। जनवरी और फरवरी 2026 में टोटल नाइट्रोजन और टोटल फॉस्फोरस स्वीकार्य सीमा से ऊपर दर्ज किए गए।
कंपनी का दावा, हमारे सैंपल ठीक : एजीएम
पेयजल कंपनी के एजीएम आदर्श भौटा का कहना है कि अपग्रेड किए गए सभी एसटीपी के सैंपल ठीक हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने खड्डों में जाकर सैंपल भरे हैं। इनमें सिर्फ एसटीपी का ही पानी नहीं पहुंचता है बल्कि आसपास के अन्य नालों से भी पानी बहता है। इसके अलावा अवैध डंपिंग से भी कई बार पानी दूषित होता है। दावा किया कि कंपनी के सैंपल ठीक है।
इनसेट
प्रदेशभर के 10 अन्य एसटीपी में एक साल में 62 सैंपल फेल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट बताती है कि समस्या केवल शिमला तक सीमित नहीं है। बीते एक साल में मंडी जिले के जोगिंद्रनगर एसटीपी के नौ नमूने फेल पाए गए। मंडी जिले के खलियार एसटीपी में सात नमूने फेल हुए। जून, नवंबर और दिसंबर 2025 में फीकल कोलीफॉर्म की अधिकता दर्ज की गई। रघुनाथ का पाधर एसटीपी के सात नमूने अमानक पाए गए। सुंदरनगर नगर परिषद प्लांट के एसटीपी में छह नमूने फेल हुए। बीबीएमबी सुंदरनगर एसटीपी के नौ नमूने फेल पाए गए। शिमला जिले के रोहड़ू एसटीपी में सात नमूने अमानक पाए गए। जुब्बल एसटीपी में तीन नमूने फेल पाए गए। सोलन जिले के परवाणू एसटीपी में छह नमूने फेल हुए। नालागढ़ एसटीपी में तीन नमूने फेल पाए गए। सरकाघाट एसटीपी में छह नमूने नए पैमानों से ऊपर पाए गए।