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Yogini Ekadashi 2026 Kab Hai: 10 या 11 जुलाई? जानिए किस दिन रखें योगिनी एकादशी का व्रत, बन रहा विशेष संयोग
Thu, 09 Jul 2026 01:43 PM IST
Ankesh Dogra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 09 Jul 2026 01:43 PM IST
सार
Yogini Ekadashi 2026 Kab Hai: आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष तिथि क्षय के कारण दो दिन मनाई जाएगी। स्मार्त श्रद्धालु 10 जुलाई और वैष्णव परंपरा के अनुयायी 11 जुलाई को व्रत रखेंगे। पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि दोनों दिनों के लिए अलग-अलग पारण का समय निर्धारित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।
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योगिनी एकादशी 2026
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष एक विशेष खगोलीय संयोग के चलते दो अलग-अलग तिथियों पर मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि के विशेष योग के कारण स्मार्त (गृहस्थ) और वैष्णव परंपरा के श्रद्धालु अलग-अलग दिन व्रत रखेंगे। इस स्थिति में, कई श्रद्धालुओं के मन में व्रत की सही तिथि को लेकर असमंजस बना हुआ है।
एकादशी तिथि का निर्धारण और पारण का समय
गंज बाजार स्थित राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने स्पष्ट किया कि एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 8:16 बजे प्रारंभ होकर 11 जुलाई को सुबह 5:22 बजे समाप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार, स्मार्त (गृहस्थ) श्रद्धालु 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे। वहीं, वैष्णव और संन्यासी परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु 11 जुलाई को व्रत करेंगे।
पारण (व्रत खोलने का समय) के संबंध में उन्होंने बताया कि 10 जुलाई को व्रत रखने वाले श्रद्धालु 11 जुलाई को सुबह 7:12 बजे से 8:57 बजे के बीच पारण कर सकते हैं। इसके विपरीत, 11 जुलाई को व्रत करने वाले वैष्णव श्रद्धालु 12 जुलाई को सुबह 5:32 बजे से 8:18 बजे के बीच पारण करेंगे।
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एकादशी तिथि का निर्धारण और पारण का समय
गंज बाजार स्थित राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने स्पष्ट किया कि एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 8:16 बजे प्रारंभ होकर 11 जुलाई को सुबह 5:22 बजे समाप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार, स्मार्त (गृहस्थ) श्रद्धालु 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे। वहीं, वैष्णव और संन्यासी परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु 11 जुलाई को व्रत करेंगे।
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पारण (व्रत खोलने का समय) के संबंध में उन्होंने बताया कि 10 जुलाई को व्रत रखने वाले श्रद्धालु 11 जुलाई को सुबह 7:12 बजे से 8:57 बजे के बीच पारण कर सकते हैं। इसके विपरीत, 11 जुलाई को व्रत करने वाले वैष्णव श्रद्धालु 12 जुलाई को सुबह 5:32 बजे से 8:18 बजे के बीच पारण करेंगे।
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योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व और पूजा विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। यह मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत, पूजा और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से जीवन के पापों का क्षय होता है, साथ ही सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, फल और पंचामृत अर्पित कर पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।
धर्माचार्यों ने व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुछ विशेष निर्देश भी दिए हैं। उनके अनुसार, ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान के बाद भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए। दिनभर सात्विक आचरण, भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम अथवा गीता का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। व्रत के दौरान क्रोध, असत्य, निंदा और तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहने की सलाह दी गई है।
परंपराओं का सम्मान और नियमपूर्वक व्रत का महत्व
पंडित उमेश नौटियाल ने यह भी स्पष्ट किया कि अलग-अलग पंचांगों और परंपराओं के कारण व्रत की तिथियों में अंतर होना एक सामान्य बात है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपनी परंपरा और गुरुजनों की सलाह के अनुसार ही व्रत करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि योगिनी एकादशी आत्मशुद्धि, संयम और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे पूर्ण श्रद्धा और नियमपूर्वक मनाना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। यह मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत, पूजा और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से जीवन के पापों का क्षय होता है, साथ ही सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, फल और पंचामृत अर्पित कर पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।
धर्माचार्यों ने व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुछ विशेष निर्देश भी दिए हैं। उनके अनुसार, ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान के बाद भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए। दिनभर सात्विक आचरण, भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम अथवा गीता का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। व्रत के दौरान क्रोध, असत्य, निंदा और तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहने की सलाह दी गई है।
परंपराओं का सम्मान और नियमपूर्वक व्रत का महत्व
पंडित उमेश नौटियाल ने यह भी स्पष्ट किया कि अलग-अलग पंचांगों और परंपराओं के कारण व्रत की तिथियों में अंतर होना एक सामान्य बात है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपनी परंपरा और गुरुजनों की सलाह के अनुसार ही व्रत करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि योगिनी एकादशी आत्मशुद्धि, संयम और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे पूर्ण श्रद्धा और नियमपूर्वक मनाना चाहिए।