{"_id":"6a54b1643f5b8e53c002b840","slug":"ashadh-amavasya-2026-kab-hai-ashadh-amavasya-date-tithi-snan-daan-muhurat-pujan-vidhi-2026-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ashadh Amavasya 2026: आज या कल कब है आषाढ़ अमावस्या ? जानिए स्नान-दान और पूजा का धार्मिक महत्व","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Ashadh Amavasya 2026: आज या कल कब है आषाढ़ अमावस्या ? जानिए स्नान-दान और पूजा का धार्मिक महत्व
Mon, 13 Jul 2026 03:09 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 13 Jul 2026 03:09 PM IST
सार
Ashadh Amavasya 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ अमावस्या का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या की तिथि 13 जुलाई को शाम 6 बजकर 51 मिनट से शुरू होगी, जिसका समापन 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर होगा।
विज्ञापन
Ashadha Amavasya 2026: स्नान, दान और पितृ तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Ashadh Amavasya 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ अमावस्या को बहुत ही शुभ,पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। अमावस्या तिथि पर पितरों को तर्पण, पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य के लिए विशेष मान जाता है। अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती और इस दिन पितरों को तर्पण देने के विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की आराधना का खास महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भक्ति भा से स्नान, दान और पितृ तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद पूरे घर के सदस्यों को मिलता है। आइए जानते हैं आषाढ़ अमावस्या की तिथि, महत्व और पूजा विधि।
आषाढ़ अमावस्या तिथि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या की तिथि 13 जुलाई को शाम 6 बजकर 51 मिनट से शुरू होगी, जिसका समापन 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर अमावस्या तिथि 14 जुलाई को मनाई जाएगी।
आषाढ़ अमावस्या पूजा और स्नान मुहूर्त
आषाढ़ अमावस्या पर पूजा और स्नान का विशेष महत्व होता है। इस दिन स्नान और दान करने का विशेष मुहूर्त सुबह 4 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। ऐसे में इस मुहूर्त में स्नान, तर्पण और दान करने का विशेष महत्व होता है।
विज्ञापन
आषाढ़ अमावस्या का धार्मिक महत्व
पितरों को तर्पण और उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए हिंदू धर्म में आषाढ़ अमावस्या पर दान और पूजा पाठ का विशेष महत्व होता है। ऐसे में इस दिन सुबह ब्रह्रा मुहूर्त में स्नान करके सूर्यदेव को अर्घ्य देकर, पितरों को तर्पण करना, तिल और धन का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों की आत्म की शांति और परिवार में सुख-समृद्धि के लिए इस तिथि पर पीपल के पेड़ की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। इससे जीवन में सकारात्मकता आती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
आषाढ़ अमावस्या तिथि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या की तिथि 13 जुलाई को शाम 6 बजकर 51 मिनट से शुरू होगी, जिसका समापन 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर अमावस्या तिथि 14 जुलाई को मनाई जाएगी।
विज्ञापन
आषाढ़ अमावस्या पूजा और स्नान मुहूर्त
आषाढ़ अमावस्या पर पूजा और स्नान का विशेष महत्व होता है। इस दिन स्नान और दान करने का विशेष मुहूर्त सुबह 4 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। ऐसे में इस मुहूर्त में स्नान, तर्पण और दान करने का विशेष महत्व होता है।
विज्ञापन
आषाढ़ अमावस्या का धार्मिक महत्व
पितरों को तर्पण और उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए हिंदू धर्म में आषाढ़ अमावस्या पर दान और पूजा पाठ का विशेष महत्व होता है। ऐसे में इस दिन सुबह ब्रह्रा मुहूर्त में स्नान करके सूर्यदेव को अर्घ्य देकर, पितरों को तर्पण करना, तिल और धन का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों की आत्म की शांति और परिवार में सुख-समृद्धि के लिए इस तिथि पर पीपल के पेड़ की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। इससे जीवन में सकारात्मकता आती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या पर राशि अनुसार करें इन चीजें का दान, मिलेगा पितरों का आशीर्वाद!
Guru Purnima 2026: 28 या 29 जुलाई, कब रखा जाएगा गुरु पूर्णिमा का व्रत? जानें सही तारीख और महत्व
Solah Somvar Vrat Niyam: सावन में करने जा रहे हैं सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत ? जानें 3 बड़े नियम
Mandir Jaane Ka Samay: कब जाना चाहिए मंदिर? जानिए सही समय, नियम और मान्यताएं
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।