आज यानी 12 सितंबर को अनंत चतुर्दशी है और इसी दिन गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन होगा। गणेश जी की विदाई के साथ ही पिछले 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का समापन हो जाएगा। अनंत चतुर्दशी का बहुत ही महत्व है। एक ओर जहां इस दिन गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन होता है तो वहीं इस अनंत चतुर्दशी का पौराणिक महत्व है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन क्यों किया जाता है। आइए जानते है विसर्जन की कहानी और अनंत चतुर्दशी का पौराणिक महत्व।
Ganesh Visarjan 2019: गणेश विसर्जन शुभ मुहूर्त और अनंत चतुर्दशी पूजा विधि
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव के बाद गणेशजी की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है। पुराणों के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने गणेश चतुर्थी के दिन से भगवान गणेश को महाभारत की कथा सुनाना आरंभ किया था। लगातार दस दिनों तक वेदव्यास आंखे बंद कर भगवान गणेश को कथा सुनाते रहे और गणेशजी उसे बिना आराम किए उसे लगातार लिखते रहे।
दस दिनों के बाद जब महाभारत की कथा पूरी हुई तो वेदव्यास जी ने आंखे खोली तो देखा कि लगातार लिखते हुए गणेशजी के शरीर का तापमान काफी बढ़ गया था, तब गणेशजी के तापमान को कम करने के लिए वेदव्यास ने तालाब में गणेश जी को स्नान कराया। जिसके बाद उनके शरीर का तापमान सामान्य हुआ। जिस दिन उन्होंने गणेश जी को स्नान कराया गया था उस दिन अनंत चर्तुदशी थी इसलिए इस दिन को गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाने लगा।
गणपति विसर्जन का शुभ मुहुर्त
इस बार गणेश विसर्जन 12 सितंबर गुरुवार के दिन है। गणेश विसर्जन 12 सितंबर को सुबह 7 बजे से शुरू होकर 1 बजकर 30 मिनट तक चलेगा। इसके बाद दोपहर को 3 बजे से रात के 12 बजे तक चलेगा। अगर आप घर पर ही गणेश जी का विसर्जन करना चाहते है तो एक गमले में पानी भरकर उसमें गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जित करें और उसके बाद उसमें मिट्टी डालकर पौधा लगा दें, लेकिन उस गमले मे कभी तुलसी का पौधा न लगाएं क्योंकि तुलसी भगवान गणेशजी को नहीं चढ़ाई जाती है।