इन दिनों देशभर में गणेश उत्सव की धूम है। हर तरफ गणपति पंडाल और गणपति बप्पा मोरया से वातावरण गुंजायमान है। इस बार गणेश महोत्सव का पर्व 2 सितंबर से शुरू हुआ और 12 सितंबर को समाप्त होगा। गणेश चतुर्थी के दिन घर या पंडालों में गणपति की प्रतिमा को स्थापित की जाती है। 10 दिन श्री गणेश प्रतिमा हमारे घर, मंदिर में विराजित रही और अब उनकी विदाई होगी। इन 10 दिन तक उन्हें प्रसन्न करने के हर प्रकार के जतन किए जाते हैं। उन्हें तरह-तरह का भोग लगाया जाता है। उनकी पूजा अर्चना की जाती है। और 10वें दिन विघ्नहर्ता का विधि पूर्वक विसर्जन किया जाता है। 12 सितंबर को गणपति बप्पा मोरया अगली बरस तू जल्दी आ के साथ सभी गणपति भक्त विघ्नहर्ता का विसर्जन करेंगे।
Ganesh Visarjan 2019: गणेश विसर्जन आज, जानिए अनंत चतुर्दशी का महत्व
गणेश प्रतिमा के विसर्जन का महत्व
भगवान गणेश के विसर्जन का अपना ही एक अलग महत्व है। इस विसर्जन में एक संदेश छिपा होता है। मान्यता अनुसार देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का जल में विसर्जन करने से उनका अंश प्रतिमा से निकलकर अपने लोक पहुंच जाता है । साथ ही गणपति विसर्जन का एक सार यह भी है कि जिंदगी नश्वर है, जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है। प्रकृति रूपी ब्रह्म से जीवन मिला है और एक दिन उसे परम ब्रह्म रूपी प्रकृति में ही मिल जाना है।
गणेश प्रतिमा विसर्जन की विधि
सर्वप्रथम श्री गणेश जी का स्वस्तिवाचन करने का विधान है। एक स्वच्छ लकड़ी को गंगाजल या गौमूत्र से पवित्र करना चाहिए। उस पर स्वास्तिक बनाए और अक्षत रखें और फिर लाल वस्त्र से उसे सुसज्जित करे । फूलों से सजाएं। लाल गुलाब से सजानें का विशेष महत्व है। अब गणेश जी को उनके स्थापना वाले स्थान से इस लकड़ी पर विराजित करें।
इस बार गणेश विसर्जन 12 सितंबर गुरुवार के दिन है। गणेश विसर्जन 12 सितंबर को सुबह 7 बजे से शुरू होकर 1 बजकर 30 मिनट तक चलेगा। इसके बाद दोपहर को 3 बजे से रात के 12 बजे तक चलेगा। आगे जानिए यदि घर पर ही करना चाहते हैं विसर्जन तो कौन सी विधि अपनाएं।
