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पार्वती की सखियों ने किया था ये काम तभी से इस तीज का नाम पड़ गया हरतालिका

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: कशिश मिश्रा Updated Fri, 30 Aug 2019 03:47 PM IST
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hartalika teej vrat and importance
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हरतालिका तीज के व्रत के प्रति महिलाओं और युवतियों में गहरी आस्था है। मान्यता है कि यह व्रत अच्छे पति की कामना के लिए किया जाता है। इस वर्ष तीज 1 सितंबर को मनाई जाएगी। हिन्दू धर्म मैं महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार इस व्रत को माता पार्वती ने शिव जी को पति रूप में प्राप्त करने के लिए किया था। 



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कथा के अनुसार माता पार्वती ने शिव जी को मन ही मन ही अपना पति मान लिया था, परन्तु उनके पिता पर्वतराज हिमालय इस विवाह से प्रसन्न नहीं थे। वो अपनी पुत्री का विवाह विष्णु भगवान से करवाना चाहते थे 

 
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hariyali teej - फोटो : amar ujala
माता पार्वती जी की मन की बात उनकी सखियां जानती थीं। कथा के अनुसार माता पार्वती की सखियां उन्हें बिना बताए हरकर एक वन में ले गईं जहां मां ने तब तक तपस्या की जब तक शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वचन नहीं दिया। रोचक तथ्य यह है कि माता पार्वती की सखियों ने उन्हें बिना बताए हरकर वन में गईं तभी से इस व्रत का नाम हरतालिका तीज पड़ गया। 

 
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व्रत के  नियम 
हरतालिका का व्रत एक निर्जला व्रत है। इस व्रत के दौरान पानी भी नहीं लिया जाता जबकि रात्रि जागरण और शिव जी के ध्यान में निराहार रहा जाता है। व्रत प्रारम्भ करने के अगले दिन ही सूर्योदय के पश्चात जल और अन्न ग्रहण करना होता है।  

 
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teej - फोटो : अमर उजाला
कौन रखता है ये व्रत 
यह व्रत केवल सुहागन और कुवारी कन्याएं रखती हैं। मान्यता है कि अगर यह व्रत प्रारम्भ कर दिया तो इसे बीच में छोड़ा नहीं जा सकता। इस व्रत में सोना भी वर्जित है। संपूर्ण रात्रि शिव जी का ध्यान, भजन और कीर्तन बड़ा ही शुभ माना जाता है। 
 
इस व्रत मैं ऐसा विधान भी है कि अगर कोई महिला ख़राब स्वास्थ्य की वजह से व्रत ना रख पाए तो वो एक बार उद्यापन करने के पश्चात फलाहार व्रत रख सकती हैं।  
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