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Holi 2026: होली पर चंद्र ग्रहण और भद्रा का साया, जानिए होलिका दहन कब करना रहेगा शुभ ?
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 23 Feb 2026 05:44 PM IST
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सार
इस वर्ष होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण और भद्रा का साया बना हुआ है जिसके चलते होलिका दहन और होली की तारीख को लेकर कन्फ्जून बना हुआ है।
Chandra Grahan On Holi 2026
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Holi 2026: जैसे-जैसे होली की तारीख नजदीक आ रही है वैसे-वैसे लोगों के मन में इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति बनी है कि होलिका दहन कब करें और रंगों वाली होली कब खेली जाएगी ? दरअसल इस वर्ष होली पर चंद्रग्रहण और भद्रा का साया दोनों ही रहेगा जिसके कारण कई ज्योतिषियों का अलग-अलग मत है। हिंदू पंचांग के अनुसार होलिका दहन हर वर्ष पूर्णिमा की रात को किया जाता है और इसके अगले दिन प्रतिपदा के दिन रंगों वाली होली खेली जाती है। लेकिन इस बार होलिका दहन पर भद्रा और चंद्रग्रहण का साया रहेगा। ऐसे में होलिका दहन और होली को लेकर कुछ मतभेद हैं।
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होली पर फाल्गुन पूर्णिमा तिथि, भद्राकाल और चंद्रग्रहण
कब से कब तक पूर्णिमा तिथि ?
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा की शुरुतात 2 मार्च की शाम 5:55 बजे से हो रही है और इसका समापन 3 मार्च को शाम 5:07 बजे होगा।
भद्राकाल कब से कब तक ?
इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा पर भद्रा काल साया रहेगा। यानि भद्राा का वास पृथ्वी पर रहेगा। भद्रा पूरी रात रहने के कारण पुच्छ काल में ही दहन करना शास्त्र अनुसार शुभ बताया गया है। पूर्णिमा तिथि के लगते ही भद्रा शुरू हो जाएगी यानी 2 मार्च को शाम 5। 55 मिनट से भद्रा आरंभ होगी। भद्रा पुंछ 3 मार्च को 01।25 एम से 02।35 एएम तक रहेगी। भद्रा मुख का समय 03 मार्च को 02।35 एएम से 04।30 एएम तक रहेगा। भद्रा काल की समाप्ति का समय 3 मार्च को 5। 28 मिनट एम तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन के लिए पूर्णिमा तिथि, भद्रा मुक्त काल और रात्रि काल का होना जरूरी माना जाता है। ऐसे में 2 मार्च को शाम 5 बजकर 55 मिनट से लेकर 3 मार्च को सुबह 5 बजकर 28 मिनट तक भद्रा रहेगी। ऐसे में पुच्छ काल में ही होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत रहेगा।
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चंद्रग्रहण का साया
इस वर्ष होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण का साया भी साया रहेगा। साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक लगेगा। जिसके कारण सूतक सुबह 9 बजकर 20 मिनट से शुरू हो जाएगा।
होलिका दहन कब करें
शास्त्रों में होलिका दहन को लेकर वर्णन मिलता है 'भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा' यानी भद्रा में श्रावणी राखी और होली दहन करना वर्जित होता है। भद्रा मुक्त काल, प्रदोष काल, पूर्णिमा तिथि पर करना शुभ और मंगलकारी होता है। ज्योतिष शास्त्र कुछ विद्वान, पुच्छ काल में ही दहन करना शास्त्र अनुसार शुभ बता रहे हैं। वहीं कुछ विद्वान 3 मार्च 2026 को चंद्रग्रहण शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा ऐसे में सूतक काल की समाप्ति के बाद दहन करना शुभ मान रहे हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार 2 मार्च की अर्धरात्रि के बाद, 12 बजकर 50 मिनट से 02 बजकर 02 मिनट के बीच होलिका दहन का श्रेष्ठ समय मान रहे हैं।
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होली 4 मार्च को
फाल्गुन पूर्णिमा तिथि पर चंद्रग्रहण और भद्रा का साया रहने के कारण 4 मार्च को रंगों वाली होली मनाई जाएगी। साल का पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च को 3 बजकर 20 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक लगेगा। भारत में ग्रहण चन्द्रोंदय के साथ शाम 6 बजकर 14 मिनट से शुरू होगा और 6 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा। ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारम्भ होगा। यानि सुबह 9 बजकर 20 मिनट से सूतक लगेगा। सूतक काल में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य और पर्व मनाना शुभ नहीं होता है, इसलिए 3 मार्च को होली नहीं खेली जाएगी। चंद्रग्रहण और सूतक की वजह से 4 मार्च को रंगों का त्योहार होली मनाई जाएगी।
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होलिका दहन के लिए शास्त्रीय नियम
पूर्णिमा तिथि: होलिका दहन के समय पूर्णिमा तिथि का होना आवश्यक माना गया है।
भद्रा रहित मुहूर्त: भद्रा काल के दौरान शुभ कार्य समेत होलिका दहन नहीं जाता है। भद्रा जब चरम पर हो तब होलिका दहन करना वर्जित माना गया है।
भद्रा पूंछ - आपातकालीन स्थिति में भद्रा पूंछ के दौरान होलिका दहन किया जा सकता है। लेकिन भद्रा मुख में दहन कभी नहीं करना चाहिए।