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Holi 2026: 3 या 4 मार्च किस दिन खेली जाएगी रंगों वाली होली? चंद्रग्रहण के कारण तिथि में बदलाव
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Sun, 22 Feb 2026 08:38 AM IST
सार
Holi 2026: इस बार होली की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल होलिका दहन और रंगों वाली होली की तारीख क्या रहने वाली है।
Holi kab hai: हिंदू परंपरा में होली एक प्रमुख त्योहार है। देशभर में इस पर्व का इंतजार केवल रंग खेलने के लिए नहीं, बल्कि उस उमंग और उत्साह के लिए भी होता है जो हर गली और मोहल्ले में दिखाई देता है। हालांकि इस बार होली की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई लोग यह जानना चाह रहे हैं कि त्योहार 3 मार्च को मनाया जाएगा या 4 मार्च को। पंचांग की गणना, तिथि और ग्रह-नक्षत्रों के योग के कारण भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। ऐसे में आइए इसे सरल शब्दों में समझते हैं।
होलिका दहन कब है?
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 5:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की शाम 05:07 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा के साथ ही भद्रा काल भी लगेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन के लिए उत्तम माना जाता है। इसलिए होलिका दहन का शुभ समय 3 मार्च 2026, मंगलवार को शाम 06:22 बजे से रात 08:50 बजे तक रहने वाला है। इसकी कुल अवधि 02 घण्टे 28 मिनट की रहेगी।
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3 मार्च या 4 मार्च, कब मनाएं होली?
- फोटो : adobe stock
3 मार्च या 4 मार्च कब मनाएं होली?
पंचांग के अनुसार इस वर्ष अधिकमास के कारण कई पर्वों की तिथियों में बदलाव देखा गया है। पिछले वर्ष जहां होली मार्च के मध्य में पड़ी थी, वहीं इस बार रंगों का त्योहार 4 मार्च को मनाया जाएगा। अलग-अलग पंचांगों में तिथि के अंतर के कारण लोगों में भ्रम बना, लेकिन रंगों वाली होली 4 मार्च को ही मान्य है।
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चंद्रग्रहण का प्रभाव
- फोटो : Freepik
चंद्रग्रहण का प्रभाव
साल पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और यह ग्रहण 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा। ग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है। सूतक काल के दौरान शुभ कार्य, पूजा-पाठ और उत्सव करना उचित नहीं माना जाता। यही कारण है कि 3 मार्च को रंगों का उत्सव न मनाकर 4 मार्च को होली खेलना शास्त्रों के अनुसार सही माना गया है।
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होली 2026
- फोटो : Adobe
3 मार्च को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी। इस दिन स्नान, दान, व्रत और कुलदेवता की पूजा का विशेष महत्व रहेगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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