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July Month Festival 2022: जानिए जुलाई महीने में आने वाले प्रमुख व्रत और त्योहार
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 27 Jun 2022 05:16 PM IST
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जुलाई कैलेंडर 2022: जुलाई माह में चातुर्मास आरंभ हो जाएंगे और भगवान विष्णु चार मास के लिए निद्रा में चले जाएंगे।
- फोटो : अमर उजाला
July Month Vrat Festival 2022: जुलाई का महीना धार्मिक नजरिए से बहुत ही खास रहने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार जुलाई का महीना आषाढ़-सावन का महीना होता है। इस महीने की शुरुआत विश्व प्रसिद्ध पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के साथ होगी। इसी माह चातुर्मास भी आरंभ हो जाएंगे और भगवान विष्णु चार मास के लिए निद्रा में चले जाएंगे। गुरु पूर्णिमा का त्योहार भी इसी महीने है। आइए जानते हैं जुलाई महीने में होने वाले प्रमुख व्रत-त्योहार की लिस्ट...
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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा
01 जुलाई ,पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा:
विश्व प्रसिद्ध पुरी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा जुलाई महीने के पहले दिन यानी 01 जुलाई, शुक्रवार के दिन शुभारंभ हो जाएगी। पुरी रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्रा संग शोभा यात्रा निकाली जाती है।
विश्व प्रसिद्ध पुरी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा जुलाई महीने के पहले दिन यानी 01 जुलाई, शुक्रवार के दिन शुभारंभ हो जाएगी। पुरी रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्रा संग शोभा यात्रा निकाली जाती है।
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- फोटो : Istock
03 जुलाई, वरदा चतुर्थी:
03 जुलाई 2022 को वरदा चुतर्थी का व्रत रखा जाएगा। वरदा चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित त्योहार है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा-आराधना और वंदना जरूर की जाती है।
03 जुलाई 2022 को वरदा चुतर्थी का व्रत रखा जाएगा। वरदा चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित त्योहार है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा-आराधना और वंदना जरूर की जाती है।
देवशयनी एकादशी
- फोटो : अमर उजाला
10 जुलाई, देवशयनी एकादशी और बकरीद
10 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीनों के लिए क्षीर सागर में मां लक्ष्मी संग निद्रा में चले जाते हैं। आषाढ़ महीने में पड़ने के कारण इस एकादशी को आषाढ़ी एकादशी भी कहते हैं। इसके अलावा इसे हरिशयनी एकादशी और पद्मनाभा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। चार महीनों के लिए सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु के शयनकाल के कारण सृष्टि का संपूर्ण कार्यभार भगवान शिव अपने कंधों पर ले लेते हैं। इन चार महीनों में किसी भी तरह का शुभ कार्य वर्जित हो जाता है। देवशयनी एकादशी तिथि से ही चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है।
10 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीनों के लिए क्षीर सागर में मां लक्ष्मी संग निद्रा में चले जाते हैं। आषाढ़ महीने में पड़ने के कारण इस एकादशी को आषाढ़ी एकादशी भी कहते हैं। इसके अलावा इसे हरिशयनी एकादशी और पद्मनाभा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। चार महीनों के लिए सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु के शयनकाल के कारण सृष्टि का संपूर्ण कार्यभार भगवान शिव अपने कंधों पर ले लेते हैं। इन चार महीनों में किसी भी तरह का शुभ कार्य वर्जित हो जाता है। देवशयनी एकादशी तिथि से ही चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है।
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प्रदोष व्रत की विधि
11 जुलाई, प्रदोष व्रत और जया पार्वती व्रत प्रारंभ
11 जुलाई को प्रदोष व्रत के साथ जया पार्वती व्रत भी प्रारंभ हो जाएगा। जया पार्वती व्रत लगातार पांच दिनों तक चलता है। इसमें मां पार्वती को जया अवतार के रूप पूजा-अर्चना होती है। इस व्रत में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए मां पार्वती की पूजा करते हुए आशीर्वाद प्राप्ति करती हैं।
11 जुलाई को प्रदोष व्रत के साथ जया पार्वती व्रत भी प्रारंभ हो जाएगा। जया पार्वती व्रत लगातार पांच दिनों तक चलता है। इसमें मां पार्वती को जया अवतार के रूप पूजा-अर्चना होती है। इस व्रत में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए मां पार्वती की पूजा करते हुए आशीर्वाद प्राप्ति करती हैं।