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Lakshmi Panchami 2026: लक्ष्मी पंचमी आज, समुद्र मंथन से प्रकट हुईं महालक्ष्मी , जानिए पूजा विधि और महत्व
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Mon, 23 Mar 2026 11:44 AM IST
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सार
Lakshmi Panchami 2026: आज 23 मार्च 2026 को लक्ष्मी पंचमी का व्रत रखा जा रहा है। लक्ष्मी पंचमी पर व्रत और मां लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक परेशानियों से निजात मिलती और घर धन-धान्य से भर जाता है।
लक्ष्मी पंचमी 2026
- फोटो : adobe stock
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विस्तार
Lakshmi Panchami 2026: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाने वाली लक्ष्मी पंचमी इस वर्ष 23 मार्च 2026, सोमवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। नवरात्रि के पावन दिनों के मध्य आने वाली यह तिथि विशेष रूप से धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी की उपासना के लिए समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में समृद्धि, सुख और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
लक्ष्मी पंचमी की पौराणिक कथा
पुराणों में वर्णित प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन हुआ, तब उस मंथन से चौदह रत्नों का उदय हुआ। इन्हीं दिव्य रत्नों में से एक थीं देवी महालक्ष्मी, जो क्षीरसागर से प्रकट हुईं। उनके प्राकट्य के साथ ही चारों ओर सौंदर्य, शांति और वैभव का प्रसार होने लगा।
कथा के अनुसार, देवी लक्ष्मी का प्राकट्य चैत्र शुक्ल पंचमी तिथि को हुआ था। जब वे प्रकट हुईं, तब सभी देवताओं ने उनका विधिपूर्वक पूजन किया और उन्हें भगवान विष्णु की अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया गया। इसी घटना की स्मृति में यह तिथि लक्ष्मी पंचमी के रूप में मनाई जाती है। यह दिन इस बात का प्रतीक है कि जहां पवित्रता, संतुलन और धर्म का पालन होता है, वहीं लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है।
लक्ष्मी पंचमी की पूजा विधि
लक्ष्मी पंचमी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ और शुद्ध वस्त्र धारण किए जाते हैं। घर और विशेष रूप से पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई की जाती है, क्योंकि देवी लक्ष्मी को स्वच्छता अत्यंत प्रिय है। इसके बाद एक चौकी पर लाल या गुलाबी वस्त्र बिछाकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है।
भोग के रूप में खीर, मिठाई, बताशे या घर में बने शुद्ध पकवान अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इसके बाद लक्ष्मी जी की आरती की जाती है और पूरे घर में दीपक जलाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जाता है।
लक्ष्मी पंचमी का यह पर्व केवल धन की प्राप्ति का नहीं, बल्कि जीवन में शुद्धता, संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक है। नवरात्र के दौरान शक्ति की साधना के साथ जब लक्ष्मी की उपासना की जाती है, तो यह साधना और भी पूर्ण और फलदायी हो जाती है।
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम से की गई पूजा से मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर अपने भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि, वैभव और शांति का संचार करती हैं। साथ ही यह तिथि इस बात का संदेश भी देती है कि जीवन में स्थायी लक्ष्मी वही है, जो धर्म, सदाचार और पवित्रता के मार्ग पर चलने से प्राप्त होती है।
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लक्ष्मी पंचमी की पौराणिक कथा
पुराणों में वर्णित प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन हुआ, तब उस मंथन से चौदह रत्नों का उदय हुआ। इन्हीं दिव्य रत्नों में से एक थीं देवी महालक्ष्मी, जो क्षीरसागर से प्रकट हुईं। उनके प्राकट्य के साथ ही चारों ओर सौंदर्य, शांति और वैभव का प्रसार होने लगा।
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कथा के अनुसार, देवी लक्ष्मी का प्राकट्य चैत्र शुक्ल पंचमी तिथि को हुआ था। जब वे प्रकट हुईं, तब सभी देवताओं ने उनका विधिपूर्वक पूजन किया और उन्हें भगवान विष्णु की अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया गया। इसी घटना की स्मृति में यह तिथि लक्ष्मी पंचमी के रूप में मनाई जाती है। यह दिन इस बात का प्रतीक है कि जहां पवित्रता, संतुलन और धर्म का पालन होता है, वहीं लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है।
लक्ष्मी पंचमी की पूजा विधि
लक्ष्मी पंचमी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ और शुद्ध वस्त्र धारण किए जाते हैं। घर और विशेष रूप से पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई की जाती है, क्योंकि देवी लक्ष्मी को स्वच्छता अत्यंत प्रिय है। इसके बाद एक चौकी पर लाल या गुलाबी वस्त्र बिछाकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है।
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पूजा के लिए एक कलश स्थापित किया जाता है, जिसमें जल भरकर उसमें आम के पत्ते और ऊपर नारियल रखा जाता है। इसके पश्चात देवी लक्ष्मी को कुमकुम, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। कमल का फूल अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना गया है।भोग के रूप में खीर, मिठाई, बताशे या घर में बने शुद्ध पकवान अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इसके बाद लक्ष्मी जी की आरती की जाती है और पूरे घर में दीपक जलाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जाता है।
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लक्ष्मी पंचमी का महत्वलक्ष्मी पंचमी का यह पर्व केवल धन की प्राप्ति का नहीं, बल्कि जीवन में शुद्धता, संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक है। नवरात्र के दौरान शक्ति की साधना के साथ जब लक्ष्मी की उपासना की जाती है, तो यह साधना और भी पूर्ण और फलदायी हो जाती है।
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम से की गई पूजा से मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर अपने भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि, वैभव और शांति का संचार करती हैं। साथ ही यह तिथि इस बात का संदेश भी देती है कि जीवन में स्थायी लक्ष्मी वही है, जो धर्म, सदाचार और पवित्रता के मार्ग पर चलने से प्राप्त होती है।
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