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Navratri Day 5: चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन आज, पढ़ें स्कंदमाता की संपूर्ण कथा

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Megha Kumari Updated Mon, 23 Mar 2026 06:06 AM IST
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सार

Navratri Day 5: चैत्र नवरात्रि की पंचमी तिथि को मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप, मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। उनका स्वरूप अत्यंत सौम्य और ममतामयी है, जिसमें देवी अपने पुत्र स्कंद यानी भगवान कार्तिकेय को गोद में लिए हुए दिखाई देती हैं।

Navratri Day 5 Maa Skanda Mata katha in hindi know skandamata mantra
Navratri Day 5 Maa Skanda Mata katha - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

Navratri Day 5: नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विधान है। मान्यता है कि, इस दिन विधि-विधान से देवी की उपासना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी के साथ जीवन में सुख-शांति का वास होता है। शास्त्रों के मुताबिक, स्कंदमाता अपने भक्तों को न केवल भौतिक सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं, बल्कि साधक के बड़े से बड़े दुखों का भी अंत करती हैं। कहते हैं कि, जो लोग संतान सुख की कामना करते हैं, उनके लिए इस दिन की पूजा विशेष रूप से फलदायी है। इस दिन देवी की कथा का पाठ और केले का भोग लगाने से वह शीघ्र भी प्रसन्न होती हैं और मनचाहे परिणाम प्राप्त होते हैं। ऐसे में आइए इस कथा के बारे में जानते हैं। 

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मां स्कंदमाता की कथा
पौराणिक कथा के मुताबिक, तारकासुर नामक एक अत्यंत शक्तिशाली राक्षस को ब्रह्मा जी से विशेष वरदान प्राप्त था। इसके चलते उसका वध केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो सकता था। माना जाता है कि, इस वरदान के कारण उसका अत्याचार बढ़ता चला गया और देवता भी उससे भयभीत हो गए। यह सब देख मां पार्वती ने स्कंदमाता का रूप धारण किया और अपने पुत्र कार्तिकेय को युद्ध के लिए तैयार किया। माना जता है कि, मां के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से ही भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर का संहार कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया। इसलिए मां स्कंदमाता की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और हर प्रकार के भय, बाधा और नकारात्मकता का नाश होता है। 


मां स्कंदमाता के मंत्र
1.सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

2. या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


स्कंदमाता की आरती 

जय तेरी हो स्कंद माता।
पांचवां नाम तुम्हारा आता॥

सबके मन की जानन हारी।
जग जननी सबकी महतारी॥

तेरी जोत जलाता रहू मैं।
हरदम तुझे ध्याता रहू मै॥

कई नामों से तुझे पुकारा।
मुझे एक है तेरा सहारा॥

कही पहाडो पर है डेरा।
कई शहरों में तेरा बसेरा॥

हर मंदिर में तेरे नजारे।
गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥

भक्ति अपनी मुझे दिला दो।
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥

इंद्र आदि देवता मिल सारे।
करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥

दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए।
तू ही खंडा हाथ उठाए॥

दासों को सदा बचाने आयी।
भक्त की आस पुजाने आयी॥
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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