पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिस प्रकार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही सभी देवता, नाग, राक्षस, गंधर्व आदि एक माह के लिए पृथ्वी पर आते हैं, उसी प्रकार सूर्य के कुम्भ राशि में प्रवेश से ॠतुओं के राजा बसंत का पर्व रतिकाम महोत्सव का शुभांरभ होता है। वैसे तो बसंत ऋतु की पूरी अवधि महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका आरम्भ सर्वाधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती का प्राकट्यपर्व भी मनाया जाता है।
Basant Panchami 2019 : बसंत पंचमी पर जपें यह मंत्र, मां सरस्वती देंगी सफलता का वरदान
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सरस्वती पूजा के साथ बसंत का आगमन
बसंत ऋतु को मधुमास भी कहा जाता है। इस दिन के बाद न तो अधिक सर्दी पड़ती है और न ही अधिक गर्मी। इस मौसम में संसार के लगभग सभी वृक्ष पुरानी पत्तियों को त्यागकर नई पत्तियों व पुष्प को जन्म देते हैं। फलों में श्रेष्ठ आम में पुष्प (बौर) भी इसी दौरान दिखाई के देता है। चारों ओर हरियाली और पुष्प ही पुष्प ही नज़र आते हैं। मधुमक्खियों और भौरों का झुण्ड पुष्प लताओं पर मंडराता नज़र आता है। वातावरण में भीनी-भीनी सुगंध छा जाती है। मौसम में भारी परिवर्तन दिखाई देता है। चूंकि बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का भी प्रादुर्भाव हुआ है, अतः इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है।
इस मंत्र से प्रसन्न होंगी मां सरस्वती
श्रृष्टि में जड़ता तोड़कर चैतन्यता प्रदान करने वाली मां सरस्वती का इस दिन जो कोई भी पूजन करता है, वह विद्या व ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त करता है। चहुंओर उसका आदर-सत्कार होता है। ऐसी मान्यता है कि इसदिन दस प्रमुख श्लोकों से मां सरस्वती की आराधना करने से सभी कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है। शिक्षण संस्थानों एवं विद्यार्थियों के लिए यह दिन वरदान की तरह है। इस दिन कोई भी विद्यार्थी श्रद्धा विश्वास से मां सरस्वती की आराधना करता है तो वह परीक्षा अथवा प्रतियोगिताओं में कभी फेल नहीं होता। सभी श्लोक न आते हों तो इस दसवें श्लोक से भी मां को प्रसन्न कर सकता है।
''एमम्बितमें नदीतमे देवीतमे सरस्वति! अप्रशस्ता इव स्मसि प्रशस्तिमम्ब नस्कृधि! ''
अर्थात - मातृगणो में श्रेष्ठ, देवियों में श्रेष्ठ हे ! मां सरस्वती हमें प्रशस्ति यानी ज्ञान, धन व संपति प्रदान करें।
यदि पूर्व में दिए मंत्र को पढ़ने में परेशानी हो तो इस सरल मंत्र को पढ़कर मां सरस्वती को प्रसन्न कर ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त करें।
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥
इस भाव से करें ज्ञान की देवी का ध्यान
यहां नदीरूपा सरस्वती का आध्यात्मिक भाव सुषुम्ना नाड़ी से है, जो इड़ा व पिंगला दोनों के मध्य भाग में स्थित है, यह मूलाधार में दोनों के साथ युक्त है। यही आध्यात्मिक त्रिवेणी है, अतः बसंत पंचमी के दिन हे! माता तुम सभी देवियों में सर्वश्रेष्ठ हो, उज्जवल हो, ज्योतिर्मय हो, ब्रह्मरूपा हो, जो कोई भी तुम्हे ब्रह्मरूप में ध्यान करता है, वही तुम्हें जान सकता है, इस प्रकार के भाव के साथ मां सरस्वती की आराधना करनी चाहिए।