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Mangala Gauri Vrat 2026: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत आज, जानिए पूजाविधि और मंत्र
Tue, 04 Aug 2026 01:10 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 04 Aug 2026 01:10 PM IST
सार
Mangala Gauri Vrat 2026: सावन महीने में हर मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इसमें सुहागिन महिलाएं मां पार्वती की विधि-विधान से साथ पूजा-अर्चना करती हैं।
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मंगला गौरी व्रत पूजा विधि और मंत्र
- फोटो : AI
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विस्तार
Mangala Gauri Vrat 2026: आज 4 अगस्त 2026 को सावन मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है। सावन के महीने में हर मंगलवार के दिन पड़ने वाले व्रत को मंगला गौरी व्रत कहा जाता है। मंगला गौरी व्रत में माता पार्वती की विशेष रूप से पूजा होती है। यह व्रत नवविवाहित महिलाओं के लिए बहुत ही खास होती है। मंगला गौरी व्रत में मां पार्वती की पूजा-आराधना होती है। धार्मिक मान्यताओं क अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया जब जाकर भगवान शिव प्रसन्न हुए थे और देवी पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार्य किया था। इससे सुहाहिन महिलाएं अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु, सुखमय दांपत्य जीवन और संतान सुख की कामना करती है। आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत का महत्व और पूजा विधि समेत दूसरी अहम जानकारियां।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
सावन में हर सोमवार को जहां विधि-विधान के साथ भगवान शिव की पूजा-आराधना होती ही वहीं, इसके अगले दिन यानी मंगलवार को मंगला गौरी व्रत सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। यह व्रत स्त्रियों को न केवल वैवाहिक जीवन में सुख प्रदान करता है, बल्कि घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि भी आती है। इसके अलावा एक ऐसी मान्यता है भी जिन कन्याओं की शादी में बाधा आती है उनको यह व्रत अवश्य करना चाहिए। वहीं अगर वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती हैं तो इस व्रत को करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है और दांपत्य जीवन सुखमय होता है।
मंगला गौरी पूजा विधि
मां पार्वती के मंत्र
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके। शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
ह्रीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा।
ॐ गौरीशंकराय नमः।Solah Somvar Vrat Katha: सोलह सोमवार व्रत में करें इस कथा का पाठ, पूर्ण होंगे सभी मनोरथ
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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मंगला गौरी व्रत का महत्व
सावन में हर सोमवार को जहां विधि-विधान के साथ भगवान शिव की पूजा-आराधना होती ही वहीं, इसके अगले दिन यानी मंगलवार को मंगला गौरी व्रत सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। यह व्रत स्त्रियों को न केवल वैवाहिक जीवन में सुख प्रदान करता है, बल्कि घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि भी आती है। इसके अलावा एक ऐसी मान्यता है भी जिन कन्याओं की शादी में बाधा आती है उनको यह व्रत अवश्य करना चाहिए। वहीं अगर वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती हैं तो इस व्रत को करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है और दांपत्य जीवन सुखमय होता है।
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मंगला गौरी पूजा विधि
- मंगला गौरी व्रत के दिन व्रती स्त्री प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- फिर घर के पूजन स्थान को साफ और शुद्ध करें।
- चौकी पर लाल या पीले कपड़ा बिछाकर मां गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- देवी को हल्दी, कुमकुम, अक्षत, पुष्प, नारियल, मिठाई, फल, गेहूं, पान, सुपारी अर्पित करें।
- फिर सोलह श्रृंगार की चीजों को अर्पित करें।
- देवी पार्वती को भोग अर्पित कर पूजा करें और मंगला गौरी व्रत की कथा सुनें।
- पूजा के अंत में देवी पार्वती की आरती करें।
मां पार्वती के मंत्र
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके। शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
ह्रीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा।
ॐ गौरीशंकराय नमः।
Solah Somvar Vrat Katha: सोलह सोमवार व्रत में करें इस कथा का पाठ, पूर्ण होंगे सभी मनोरथ
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।