फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   sawan 2026 sawan pradosh vrat 2026 tithi date time shubh muhurat importance and significance

Sawan Pradosh Vrat 2026: कब है सावन प्रदोष व्रत, जानिए पूजा मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Mon, 03 Aug 2026 07:30 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 03 Aug 2026 07:30 PM IST
सार

सावन माह में प्रदोष व्रत रखने और प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा-आराधना करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।  

विज्ञापन
sawan 2026 sawan pradosh vrat 2026 tithi date time shubh muhurat importance and significance
Sawan Pradosh Vrat 2026 - फोटो : AI

विस्तार

Sawan Pradosh Vrat 2026: सावन माह में शिव आराधना का विशेष महत्व है और इस माह में पड़ने वाला व्रत भी पुण्यदायी व्रतों में से एक माना जाता है। सावन में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है तो इस सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। प्रदोष में व्रत रखना और शिवजी की आराधना करना के विशेष फलों की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। धार्मिक मान्याताओं के अनुसार इस व्रत में प्रदोष काल में विधि-विधान के साथ शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, बेलपत्र और  भांग धतूरा मंत्र का जाप करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा मिलती है। प्रदोष व्रत करने से सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन में सुख शांति संतान सुख और रोगों से छुटकारा मिलता है। इस बार सावन प्रदोष व्रत 10 अगस्त को रखा जाएगा। आइए जानते हैं तिथि और पूजा शुभ मुहूर्त। 

विज्ञापन


सावन प्रदोष व्रत तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 10 अगस्त को सुबह 8 बजे से होगी और इस तिथि का समापन 11 अगस्त को 4 बजकर 55 मिनट पर होगा। 
विज्ञापन


जानिए सोम प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
सावन सोम प्रदोष व्रत पर पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 05 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में पूजा करना शुभ और फलदायी होता है। 

सावन सोम प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
प्रदोष व्रत पर शिव जी की पूजा और आराधना का विशेष महत्व होता है। सावन में प्रदोष व्रत आने से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त प्रदोष काल होता है। मान्यताओं के अनुसार प्रदोष का समय होता जब भगवान शिव कैशाश पर तांडव करते हैं और सभी देवी-देवता उनकी इस समय आराधना करते हैं। इस दिन व्रत रखने और प्रदोष काल में पूजा करने, दीपदान करने और शिव चालीसा और रुद्राष्टक का पाठ करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

Mangla Gauri Vrat 2026: कल है सावन का पहला मंगला गौरी व्रत? जानें पूजा विधि, मंत्र और खास नियम

Solah Somvar Vrat Katha: सोलह सोमवार व्रत में करें इस कथा का पाठ, पूर्ण होंगे सभी मनोरथ

Sawan 2026 Daan: सावन में इन चीजों का दान, दिलाएगा शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से छुटकारा


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed