माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को भारत के भिन्न-भिन्न प्रांतों में भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता हैं जिसमें मुख्य रूप से बसंत पंचमी, सरस्वती पूजा, वागीश्वरी जयंती, रति काम महोत्सव, बसंत उत्सव आदि है। मूलत: बसंत माह भारत के छह ऋतुओं में सर्वश्रेष्ठ इसलिए माना जाता है कि आज के ही दिन सृष्टि के सबसे बड़े वैज्ञानिक के रूप में जाने जाने वाले ब्रह्मदेव ने मनुष्य के कल्याण हेतु बुद्धि, ज्ञान विवेक की जननी माता सरस्वती का प्राकट्य किया था। सबसे पहले आइए जानते हैं माता सरस्वती के पूजन के लिए उपयोगी कुछ मंत्र एवं पूजन मुहूर्त के बारे में -
Saraswati Puja 2019 : सरस्वती पूजन का शुभ मुहूर्त एवं राशि के अनुसार विशेष पूजन विधि
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मुहूर्त एवं पूजन विधि
ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा तो आज पूरे दिन श्रद्धा भाव से की जा सकती है लेकिन माता सरस्वती की विशेष पूजा प्रात: 7:22 से 12:34 मिनट तक अत्यंत शुभ है।
पूजन विधि
— सर्वप्रथम प्रात: स्नान के पश्चात नवोदित सूर्य किरणों को जल दें।
— स्नान के पश्चात् पीला, केसरिया व सफेद वस्त्र धारण करें।
— पूजा के लिए माता सरस्वती की मूर्ति फोटो या तस्वीर ईशान कोण पर, पूर्व दिशा या उत्तर दिशा में ही रखें।
— माता सरस्वती को सफेद चंदन अथवा मलयगिरि का चंदन लगाएं।
— देवी को सफेद एवं पीले फूल अर्पित करें।
— परीक्षार्थीं जिनकी परीक्षाएं निकट होने वाली हों, वह अपना प्रवेश पत्र भी श्रद्धापूर्वक माता को अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त करें।
इन मंत्रों का करें जाप
माता सरस्वती का मंत्र
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं,
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्,
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥2॥
माता सरस्वती का बीज मंत्र
ॐ ऐं ऐं ऐं महासरस्वत्यै नम: का जाप करें।
सूर्य देवता का मंत्र
ॐ घृणि सूर्याय नम:
भगवान विष्णु का मंत्र
ॐ पालनहाराय विष्णुवे विद्यारूपाय नम:।
राशि के अनुसार विशेष पूजा के लिए अगली स्लाइड क्लिक करें -
मेष
कालपुरुष की यह प्रथम राशि है जिसके कारण ज्ञान की जननी के वाहक भगवान सूर्य स्वयं बनते हैं। अतएव मेष राशि वाले को माता सरस्वती के पूजन के पूर्व प्रात: स्नान आदि करके नवोदित सूर्य किरणों को लाल पुष्प पीला पुष्प एवं लाल चंदन जल के माध्यम से अर्पित करना चाहिए। इसके बाद प्रथम पूजा भगवान गणपति का करने के बाद माता सरस्वती के किसी भी मंत्र का आवाहन करते हुए भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना करते हुए समाप्त करना चाहिए।